Adipurush: श्रीराम ने क्यों किया था लक्ष्मण का त्याग, किसने दी थी उन्हें ऐसा करने की सलाह?

Published : Jun 15, 2023, 04:54 PM IST
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सार

Adipurush: 16 जून को बॉलीवुड की अवेटेड मूवी आदिपुरुष पूरे देश में रिलीज होने जा रही है। इस मूवी में कई कलाकार पौराणिक पात्रों के किरदार में नजर आएंगे। आदिपुरुष फिल्म में एक्टर सनी सिंह लक्ष्मण का रोल प्ले कर रहे हैं। 

उज्जैन. रामायण में भगवान श्रीराम के अलावा भी कई प्रमुख पात्र हैं, लक्ष्मण भी इनमें से एक हैं। आदिपुरुष (Adipurush) मूवी में लक्ष्मण का रोल एक्टर सनी सिंह (Actor Sunny Singh in Adipurush Movie) निभा रहे हैं। ये मूवी 16 जून, शुक्रवार को पूरे देश में एक साथ रिलीज होने जा रही है। लोगों के मन में इस मूवी को लेकर काफी उत्साह है। श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन उन्होंने कैसे और क्यों अपनी देह त्यागी, इसके बारे में कम ही लोगों को पता हैं। आगे जानिए लक्ष्मण की देह त्याग की कथा…

जब तपस्वी के रूप में काल आया श्रीराम से मिलने
वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार, जब श्रीराम द्वारा अयोध्या पर नीतिपूर्वक शासन किया जा रहा था, उस समय काल तपस्वी के रूप में अयोध्या आया। जब श्रीराम काल से मिलने के लिए राजी हुए थो उसने एक शर्त रखी कि “यदि कोई हमें बात करता हुआ देख लेगा तो आप उसे मृत्युदंड देंगे।” श्रीराम ने काल की ये बात मान ली।

लक्ष्मण को नियुक्त किया पहरेदारी पर
काल से बात करते हुए कोई दूसरा व्यक्ति कक्ष के अंदर न आने पाए, इसके लिए श्रीराम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को पहरेदारी के लिए नियुक्त किया और ये काल को दिए गए वचन के बारे में भी उन्हें बता दिया। जब काल श्रीराम से बातें कर रहा था, तभी वहां महर्षि दुर्वासा वहां आ गए। उन्होंने भी श्रीराम से मिलने की इच्छा प्रकट की। लक्ष्मण ने उन्हें कुछ देर रुकने को कहा।

जब लक्ष्मण ने लिया ये कठोर निर्णय
जब लक्ष्मण ने महर्षि दुर्वासा को रुकने को कहा तो वे क्रोधित हो गए और उन्होंने अयोध्या को नष्ट कर देने की बात कह दी। तब लक्ष्मण ने सोचा कि भले ही मेरी मृत्यु हो जाए लेकिन अयोध्या को कुछ नहीं होना चाहिए। ये सोचकर लक्ष्मण ने अंदर जाकर श्रीराम को जाकर दुर्वासा मुनि के आने की सूचना दे दी।

जब श्रीराम ने कर दिया लक्ष्मण का त्याग
महर्षि दुर्वासा से मिलने के बाद श्रीराम को अपने वचन का ध्यान आया। तब लक्ष्मण ने कहा कि “आप निश्चिंत होकर मेरा वध कर दीजिए, जिससे आपकी प्रतिज्ञा भंग न हो।” ये बात जब श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ को बताई तो उन्होंने कहा कि “आप लक्ष्मण का त्याग कर दीजिए। प्रिय व्यक्ति का त्याग व वध एक ही समान है।” श्रीराम ने ऐसा ही किया। दुखी होकर लक्ष्मण सीधे सरयू नदी के तट पर पहुंचे और योग क्रिया द्वारा अपना शरीर त्याग दिया।


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