‘अकबरी देग-विक्टोरिया टैंक’, जानें अजमेर शरीफ में और क्या है खास?

Published : Nov 29, 2024, 01:33 PM IST
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सार

Ajmer Sharif Dargah: राजस्थान के अजमेर में स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह इन दिनों सुर्खियों में है। हिंदू पक्ष ने यहां शिव मंदिर होने के दावा किया है। इसके बाद लगातार इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। 

Ajmer Sharif Dargah Vivad: हमारे देश में मुस्लिमों के अनेक धर्म स्थल विश्व प्रसिद्ध हैं। राजस्थान के अजमेर में स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह भी इनमें से एक है। इसे अजमेर शरीफ भी कहते हैं। पिछले दिनों हिंदू पक्ष ने इस दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा करके एक नए मुद्दे को हवा दे दी है। अजमेर सिविल कोर्ट ने हिंदू पक्ष की इस याचिका को स्वीकार भी कर लिया है। अजमेर शरीद दरगाह में कईं ऐसी चीजें और स्ट्रक्चर है, जो काफी खास हैं। इनमें से अकबरी देग और विक्टोरिया टैंक बहुत फेमस है। जानें अजमेर शरीफ में और क्या-क्या खास है…

भारत की सबसे बड़ी कड़ाई है अकबरी देग

अजमेर शरीफ दरगाह में भारत की सबसे बड़ी देग है, जो मुगल बादशाह अकबर ने 1569 में यहां दी थी। अकबर द्वारा दिए जाने के कारण इसे अकबरी देग कहते हैं। देग एक तरह का बर्तन होता है, जिसमें चावल आदि पकाए जाते हैं। अजमेर शरीफ में जो देग है उसका डायमीटर 10 मीटर का है। इस देग में एक बार में 4800 किलो चावल पकाए जा सकते हैं। इसी बात इस देग यानी बर्तन की विशालता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्वीन मैरी के नाम पर है विक्टोरिया टैंक

इतिहासकारों के अनुसार, ,साल 1911 में दिल्ली में जार्ज V की ताजपोशी हुई थी। उस समय उनकी पत्नी, जिनका नाम क्वीन मैरी था, अजमेर शरीफ की दरगाह पर आईं। उस समय उन्होंने दरगाह में स्थित पानी की टंकी (हौज) की मरम्मत के लिए 1500 रुपए दिए थे। यही पानी का हौज आज विक्टोरिया टैंक के नाम से जाना जाता है।

चांदी के ताजिए भी यहां

अजमेर शरीफ दरगाह में चांदी का ताजिए भी है। इसे सिर्फ मुहर्रम के मौके पर जियारत के लिए निकाला जाता है। इसी इसी मौके पर लोग इस चांदी के ताजिए को देख सकते हैं और फूल चढ़ाकर दुआ मांग सकते हैं।

ये 3 दरवाजे भी हैं खास

अजमेर शरीफ की दरगाह में 3 दरवाजे हैं। इन सभी की अलग-अलग खासियत है। सबसे पहला गेट है बुलंद दरवाजा, इसका निर्माण 1193 में सुलतान महमूद खिलजी ने करवाया था। ये गेट साल में सिर्फ एक बार उर्स के मौके पर खुलता है। दूसरा है- जन्नती दरवाजा, इसे 14वीं सदी में सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया था। तीसरा गेट है निजाम गेट, इसे 1911 में हैदरबाद के निजाम मीर उस्मानी अली ने बनवाया था।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो विद्वानों, धर्म ग्रंथों और ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

 

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