Hariyali Amawasya Ki Katha: 17 जुलाई को है हरियाली अमावस्या, इस दिन जरूर सुननी चाहिए ये कथा

Published : Jul 15, 2023, 04:40 PM ISTUpdated : Jul 17, 2023, 08:12 AM IST
hariyali amawasya ki katha

सार

Hariyali Amawasya Ki Katha: श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस बार ये अमावस्या 17 जुलाई, सोमवार को है। सोमवार को अमावस्या तिथि होने से ये सोमवती अमावस्या भी कहलाएगी। इस पर्व से जुड़ी एक कथा भी है। 

उज्जैन. इस बार हरियाली अमावस्या (Hariyali Amawasya 2023 Date) का पर्व 17 जुलाई, सोमवार को मनाया जाएगा। सोमवार को अमावस्या तिथि होने से ये सोमवती अमावस्या भी कहलाएगी। ऐसा दुर्लभ संयोग सालों में एक बार बनता है। इस दिन और भी कई शुभ योग बनेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस पर्व पर शिवजी की पूजा करने और पितरों की शांति के लिए उपाय करना चाहिए। साथ ही हरियाली अमावस्या की कथा भी सुननी चाहिए। आगे जानिए हरियाली अमावस्या की कथा…

ये है हरियाली अमावस्या की कथा (Hariyali Amawasya Ki Katha)
- प्रचलित कथा के अनुसार, किसी समय एक राज्य में पराक्रमी राजा रहता था। उसका एक बेटा और बहू भी थी। एक दिन एक दिन बहू ने चोरी से मिठाई खा ली और कहा दिया कि मिठाई तो चूहा खा गया। उसी महल में एक चूहा भी रहता था। जब उसे ये बात पता चली तो उसने निश्चय किया कि चोर को राजा के सामने लेकर आऊंगा।
- एक दिन राजा के कुछ मेहमान आए। राजा ने उन सभी को एक आलीशान कमरे में रुकवाया। चूहे ने बदला लेने के लिए बहू की साड़ी ले जाकर उस कमरे में रख दी। सुबह जब राजा ने ये देखा तो उसके मन में तरह-तरह के विचार आने लगे। राजा ने अपनी बहू को महल से निकाल दिया।
- राजा की बहू जंगल में रहने लगी। वह रोज शाम में दिया जलाती और ज्वार उगाने का काम करती थी। एक दिन किसी काम से राजा का उस जंगल से गुजरना होगा। राजा की नजर उन दीयों पर पड़ी, जो बहुत चमकदार दिख रहे थे। राजमहल लौटकर राजा ने सैनिकों को उन दीपकों को लाने जंगल भेजा।
- सैनिकों ने देखा कि दीपक आपस में बात कर रहे थे। एक शांत से दीपक से सभी ने कहा कि तुम अपनी कहानी बताओ। उस ने बताया कि वह रानी का दीपक है। उसने ये भी बताया कि रानी की मिठाई चोरी की वजह से चूहे ने रानी की साड़ी मेहमानों के कमरें में रखी थी। जिसकी सजा रानी को मिल रही है।
- जब सैनिकों ने ये बात जाकर राजा को बताई तो उन्हें अपने किए पर पछतावा हुआ और उन्होंने बहू को फिर से महल में बुलवा लिया। इस तरह सभी दोबारा से खुशी-खुशी राजमहल में रहने लगे।



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