पलाश के फूलों से छत्तीसगढ़ के गांवों में बरस रहा पैसा! आदिवासी बना रहे अलग पहचान

Published : Apr 30, 2026, 02:53 PM IST
forest produce Chhattisgarh

सार

Chhattisgarh Palash Flower Income: पलाश के फूल न सिर्फ दिखने सुंदर होते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आय का बड़ा सहारा भी हैं। छत्तीसगढ़ के कटघोरा क्षेत्र में इनका संग्रहण तेजी से बढ़ा है, जिससे आदिवासी परिवारों को रोजगार और बेहतर आमदनी मिल रही है। इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है, जिससे यह आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत जरिया बन रहे हैं।

रायपुर: पलाश के फूल न सिर्फ बेहद खूबसूरत होते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और सेहत के लिए बेहद कीमती संसाधन भी हैं। इन नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए इस्तेमाल होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मंडल कटघोरा में पलाश के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है।

औषधीय और सांस्कृतिक फूल हैं पलाश

पलाश फूल का साइंटिफिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा है, जिसे टेसू, ढाक या 'जंगल की आग' (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है। भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। कटघोरा में पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है।

पलाश फूलों के संग्रहण में इजाफा

कटघोरा वनमंडल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है। साल 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल, 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। 2022-23 में 900 रुपए प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला।

20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान

वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवनस्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।

ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल

पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।

पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल बनता है

पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

PREV

छत्तीसगढ़ की सरकारी योजनाएं, शिक्षा-रोजगार अपडेट्स, नक्सल क्षेत्र समाचार और स्थानीय विकास रिपोर्ट्स पढ़ें। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की खबरों के लिए Chhattisgarh News in Hindi सेक्शन फॉलो करें — सबसे विश्वसनीय राज्य कवरेज यहीं।

Read more Articles on

Recommended Stories

छत्तीसगढ़ में मोबाइल मेडिकल यूनिट से गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य सेवा, घर-घर इलाज से बदली ग्रामीणों की जिंदगी
Chhattisgarh News: बस्तर विकास और आदिवासी कल्याण पर CM विष्णु देव साय के बड़े फैसले