Chhattisgarh News: रायपुर सेंट्रल जेल की अनोखी पहल, महिला बंदियों को मिला रोजगार का सहारा

Published : Jul 17, 2026, 03:57 PM IST
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सार

रायपुर केंद्रीय जेल में 60 महिला बंदियों को अचार और मसाला निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। उनके बनाए उत्पाद बिक रहे हैं और आय का हिस्सा उनके खातों में जमा हो रहा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की केंद्रीय जेल रायपुर में महिला बंदियों के पुनर्वास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। जेल प्रशासन के 'निश्चय कार्यक्रम' के तहत महिला बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे जेल में रहते हुए हुनर सीख सकें और रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के साथ अपनी आजीविका भी स्वयं चला सकें। इस पहल के तहत महिला बंदियों को व्यावसायिक कौशल से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद वे जेल परिसर में ही उत्पादन कार्य से जुड़ चुकी हैं और उनके बनाए उत्पाद आम लोगों तक भी पहुंच रहे हैं।

Raipur Central Jail News: 60 महिला बंदियों को मिला अचार और मसाला निर्माण का प्रशिक्षण

केंद्रीय जेल रायपुर में विभिन्न मामलों में निरुद्ध 60 महिला बंदियों को अचार और मसाला निर्माण का विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें ऐसा कौशल देना है, जिससे वे भविष्य में स्वयं का छोटा उद्योग या व्यवसाय शुरू कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान महिला बंदियों को खाद्य उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई। इसमें गुणवत्ता बनाए रखने, स्वच्छता का पालन करने, सही पैकेजिंग, सुरक्षित भंडारण और व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां व्यावहारिक रूप से दी गईं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में नियमित रूप से अचार तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया है।

Women Prisoners Self Employment: जेल में बन रहे आम, नींबू, गाजर और लहसुन के अचार

महिला बंदियां पूरी स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए आम, नींबू, गाजर और लहसुन समेत कई प्रकार के स्वादिष्ट और हाइजीनिक अचार तैयार कर रही हैं। जेल प्रशासन ने इन उत्पादों की बिक्री की भी व्यवस्था की है। तैयार अचारों को केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था मुंगोडी सेंटर (आस्था गृह उद्योग स्टॉल) और जेल कैंटीन के माध्यम से आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से महिला बंदियों को अपने कौशल का वास्तविक अनुभव भी मिल रहा है और उनके उत्पादों को बाजार भी उपलब्ध हो रहा है।

Nishchay Programme: बिक्री से होने वाली आय सीधे बंदियों के खातों में जमा

जेल प्रशासन के अनुसार अचार की बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे संबंधित महिला बंदियों के बैंक खातों में जमा किया जा रहा है। इस व्यवस्था से महिला बंदियां आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और उनमें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक आय का अवसर भी उपलब्ध करा रही है।

Raipur Jail Initiative: जेल केवल सजा का स्थान नहीं, बदलाव की शुरुआत भी है

केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि जेल का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंड देना नहीं, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। उन्होंने बताया कि जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में संचालित निश्चय कार्यक्रम के जरिए महिला बंदियों को रोजगार से जुड़े विभिन्न कौशल सिखाए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और रिहाई के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार करना है।

Skill Development for Women Prisoners: आगे भी जारी रहेंगे रोजगारपरक प्रशिक्षण

जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिला बंदियों के बेहतर भविष्य और उनके सफल पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए इस तरह के रोजगारपरक कौशल विकास कार्यक्रम आगे भी लगातार चलाए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण महिला बंदियों को नया आत्मविश्वास देने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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