Chhattisgarh Welfare Model: छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में समाज कल्याण के क्षेत्र में कई अहम पहलें की हैं। पेंशन योजनाओं, डीबीटी, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिक सहायता और नशामुक्ति अभियान से जुड़े सरकारी आंकड़ों और प्रमुख उपलब्धियों को विस्तार से जानिए।
किसी भी राज्य की असली पहचान उसकी सड़कों या इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। बुजुर्गों को सम्मान, दिव्यांगजनों को समान अवसर, जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षा और नशे से जूझ रहे लोगों को नई शुरुआत देने वाली नीतियां ही सामाजिक विकास की वास्तविक कसौटी हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि पिछले ढाई वर्षों में समाज कल्याण के क्षेत्र में इसी सोच के साथ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
पेंशन, डीबीटी और दिव्यांगजन योजनाओं पर रहा फोकस
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या 7.10 लाख से बढ़कर 7.56 लाख हो गई है। वहीं वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजन और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 21.73 लाख से अधिक लोगों को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत हितग्राहियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए भुगतान किया जा रहा है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी प्रक्रिया से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है।
दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में भी प्रगति दर्ज की गई है। यूडीआईडी (Unique Disability ID) धारकों की संख्या 2.44 लाख से बढ़कर 2.77 लाख हो गई है। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना के लाभार्थी 1,161 से बढ़कर 17,038 तक पहुंच गए हैं। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त करने वालों की संख्या भी लगभग दोगुनी होकर 14 हजार से अधिक हो गई है।
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वरिष्ठ नागरिकों और नशामुक्ति अभियान पर विशेष जोर
बढ़ती वृद्धजन आबादी को ध्यान में रखते हुए राज्य में वृद्धाश्रमों और देखरेख संस्थाओं की क्षमता बढ़ाई गई है। सियान हेल्पलाइन (155326) पर आने वाली कॉलों की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख तक पहुंचना इस सेवा के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है।
वहीं भारत माता वाहिनी योजना के तहत संचालित नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 29 कर दी गई है। इन केंद्रों से लाभ लेने वालों की संख्या भी 1,967 से बढ़कर 5,220 तक पहुंची है। उपचार के साथ परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल प्रशासन और संस्थागत विकास पर बढ़ा निवेश
राज्य सरकार ने "सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान" के तहत सरकारी भवनों और सार्वजनिक संस्थानों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने की पहल शुरू की है। इसके अलावा विशेष विद्यालयों के उन्नयन, फिजिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर के विस्तार और दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से विभिन्न योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में समाज कल्याण विभाग का बजट 1,512 करोड़ रुपये था, जिसे 2025-26 में बढ़ाकर 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य का दावा है कि सामाजिक सुरक्षा और तकनीक के समन्वय से जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच मजबूत हुई है।
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