
भोपाल। मध्य प्रदेश के गांवों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए अपनी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक हासिल करने का रास्ता आसान हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धनतेरस के अवसर पर मुरैना जिले के ग्राम करुआ से मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत नि:शुल्क संपत्ति पंजीयन अभियान की शुरुआत की। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 50 लाख नि:शुल्क रजिस्ट्रियां कराने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और रिमोट का बटन दबाकर योजना की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने स्वामित्व योजना के हितग्राहियों से बातचीत की और उन्हें पक्के मकानों के रजिस्टर्ड दस्तावेज मिलने से होने वाले फायदे भी समझे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार गांवों में रहने वाले परिवारों को अपनी संपत्ति का ऐसा वैधानिक अधिकार मिल रहा है, जिससे वे भविष्य में जरूरत पड़ने पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ग्राम करुआ के प्राथमिक विद्यालय का उन्नयन कर उसे माध्यमिक विद्यालय बनाने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आजादी के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्री कराना एक बड़ी चुनौती रही है। गांवों में लोग अपनी जमीन पर जीवनभर की कमाई लगाकर पक्के मकान बना लेते थे, लेकिन उनके पास उस संपत्ति का कोई पंजीकृत दस्तावेज नहीं होता था। इसका खामियाजा उन्हें कई तरह से भुगतना पड़ता था। बैंक भी ऐसे मकानों के आधार पर ऋण देने से बचते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी को संपत्ति के अधिकार देने की दिशा में पहल की। अब मध्य प्रदेश सरकार ने इस काम को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना शुरू की है। इसके जरिए ग्रामीणों के मकानों की विधिवत रजिस्ट्री कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी, तहसीलदार और पटवारी मिलकर गांव-गांव में इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। दीपावली और धनतेरस के अवसर पर पात्र ग्रामीणों को बिना कोई शुल्क दिए उनकी संपत्ति के पंजीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशभर में 50 लाख नि:शुल्क रजिस्ट्रियां कराने का है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री का लाभ केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे आने वाली पीढ़ियों को भी फायदा होगा। जब गांव के बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बनेंगे और अपना नर्सिंग होम, अस्पताल या कोई दूसरा व्यवसाय शुरू करना चाहेंगे, तब उन्हें बैंक से ऋण लेने के लिए संपत्ति के पंजीकृत दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी।
रजिस्ट्री होने से परिवार के पास अपनी संपत्ति का कानूनी प्रमाण होगा। जरूरत पड़ने पर वे इस दस्तावेज का इस्तेमाल बैंक से कर्ज लेने और अन्य आर्थिक कार्यों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन गांवों में 80 से 100 प्रतिशत तक रजिस्ट्रियों का काम पूरा हो चुका है, वहां धनतेरस के अवसर पर मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी पहुंचकर हितग्राहियों को उनके दस्तावेज सौंप रहे हैं। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने इस काम में जुटे पटवारियों, तहसीलदारों और जिला प्रशासन के अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है। इसका उद्देश्य पूरे साल किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए काम करना है। सरकार खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी किसानों की आय का मजबूत जरिया बनाना चाहती है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान 25 गाय या भैंस खरीदने के लिए बैंक से लगभग 40 लाख रुपये का ऋण लेता है, तो सरकार की ओर से उसे 10 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे दूध का उत्पादन बढ़ाएं और सहकारी समितियों या अन्य माध्यमों से उसका विक्रय करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को अपनाने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अतिरिक्त अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं चला रही है। किसानों को अब सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा दूर-दराज के ग्रामीण परिवारों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का लाभ देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दीपावली के साथ गोवर्धन पूजा का पर्व भी राज्य में उत्साह और धूमधाम से मनाया जाएगा। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक-एक गांव को वृंदावन ग्राम के रूप में विकसित किया गया है। इन गांवों में खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल की गौमाता उपलब्ध कराई जा रही हैं। अच्छी नस्ल के पशुओं का पालन करने वाले गौपालकों को पुरस्कार भी दिए जा रहे हैं। आने वाले समय में विकासखंड स्तर पर अच्छे पशुओं की प्रतियोगिताएं आयोजित करने की भी योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी देकर उनकी शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसरों को प्रोत्साहित कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने योजना के लाभार्थियों से सीधे बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि मकान की पक्की रजिस्ट्री मिलने के बाद उनके जीवन में क्या बदलाव आएगा और इस पूरी प्रक्रिया का उनका अनुभव कैसा रहा। हितग्राही जगदीश यादव ने बताया कि अब उनके पक्के मकान की रजिस्ट्री उनके नाम पर हो गई है। इससे उन्हें वास्तविक मालिकाना हक मिला है। अब उनके मकान का कानूनी महत्व बढ़ेगा और वे भविष्य में अपनी जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।
रामचित कुशवाहा ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीणों को लगातार फायदा मिल रहा है। मकान की रजिस्ट्री मिलने से अब उनके पास संपत्ति का पक्का दस्तावेज है। इससे भविष्य में दूसरे जरूरी कामों के लिए भी आसानी होगी। राकेश बाथम ने मुख्यमंत्री को बताया कि रजिस्ट्री होने के बाद अब वे अपने मकान के दस्तावेजों के आधार पर बैंक से ऋण ले सकेंगे। इससे आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने सोवरन सिंह और रामखत्याहार सिंह से भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनके लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि मकानों की रजिस्ट्री कराने के लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना पड़ा। आजादी के बाद से अब तक वे अपने घरों में रह तो रहे थे, लेकिन उनके पास मालिकाना हक का ऐसा पक्का कानूनी दस्तावेज नहीं था।
हितग्राही अतर सिंह ने बताया कि उनके मकान की रजिस्ट्री पर लगभग 89 हजार रुपये का खर्च आ रहा था, जिसे सरकार ने पूरी तरह वहन किया। उन्हें अपनी जेब से कोई पैसा नहीं देना पड़ा। मुख्यमंत्री ने सभी हितग्राहियों को बधाई देते हुए कहा कि धनतेरस के शुभ अवसर पर मिला यह संपत्ति अधिकार उनके परिवारों के लिए समृद्धि और खुशहाली के नए रास्ते खोलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में ऑनलाइन क्लिक के माध्यम से रजिस्ट्री अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने पटवारी मुकेश तिवारी और विवेक सिकरवार से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने दोनों पटवारियों से पूछा कि ग्रामीणों के मकानों की रजिस्ट्री कराने के दौरान उन्हें कैसा अनुभव हो रहा है। पटवारियों ने बताया कि जब किसी ग्रामीण को उसके मकान का पक्का मालिकाना दस्तावेज मिलता है, तो उसके चेहरे पर खुशी और संतुष्टि साफ दिखाई देती है। यह उनके लिए भी बेहद सुखद अनुभव होता है।
उन्होंने कहा कि मकान छोटा हो या बड़ा, वर्षों से उसमें रहने वाले परिवार को उसका वैधानिक अधिकार दिलाना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यह काम केवल दस्तावेज तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को उनका वास्तविक अधिकार दिलाने से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने पटवारियों के समर्पण की सराहना की और अभियान में जुटे सभी कर्मचारियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट काम करने वाले तहसीलदारों और पटवारियों को सम्मानित किया। खास तौर पर 200 से अधिक रजिस्ट्रियां कराने वाले पटवारियों को उनके बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मान दिया गया। सम्मानित अधिकारियों में तहसील सबलगढ़ के तहसीलदार रवीश भदौरिया और मुरैना ग्रामीण के तहसीलदार घनश्याम शर्मा शामिल रहे।
पटवारियों में तहसील अंबाह के शिवमोहन सिंह तोमर, राजेश तोमर, सौरभ सिकरवार और संजीव शर्मा को सम्मानित किया गया। इसके अलावा तहसील बानमोर की मोहिनी शर्मा और विनोद कुलश्रेष्ठ तथा तहसील कैलारस के राधेश्याम शर्मा और नरेंद्र कुमार को भी उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान मिला।
कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस योजना ने ग्रामीण परिवारों के जीवन को सीधे प्रभावित किया है। पहले लोगों के पास अपने मकान का पंजीकृत दस्तावेज नहीं होने के कारण वे बैंक से ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीणों को संपत्ति का अधिकार देने की शुरुआत की थी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पक्की रजिस्ट्री कराकर इस पहल को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीणों के लिए पक्की रजिस्ट्री केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकार का प्रमाण है। इससे लोगों को अपनी संपत्ति पर कानूनी भरोसा मिलेगा और भविष्य में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
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