Dr. Mohan Yadav in Ujjain: दत्त अखाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, शिप्रा स्नान कर लिया पुण्यलाभ

Published : May 02, 2024, 04:21 PM IST
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सार

चुनावों की व्यस्तता के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने पंचकोशी परिक्रमा प्रारंभ होने से पूर्व घाटों का निरीक्षण किया।

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचे। चुनावों की व्यस्तता के बीच उज्जैन पहुंचकर उन्होंने मां क्षिप्रा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मां क्षिप्रा का पूजन-अर्चन कर चुनरी चढ़ाई एवं घाटों का निरिक्षण भी किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया बंधुओं से संवाद कर उज्जैन की महत्ता पर प्रकाश डाला और उन लोगों पर निशाना भी साधा जो चुनावी राजनीति के लिए क्षिप्रा नदी के प्रदूषण का मुद्दा उठाकर मां क्षिप्रा पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का संतोष है हमारी सरकार द्वारा किए गए कामों के बलबूते उज्जैन में पूरे साल नदी का जल मिल रहा है। आज से 20 साल पहले नवंबर के बाद दिसंबर में ही पानी नहीं मिलता था कई बार सुखा पड़ जाता था। हमारे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से नर्मदा क्षिप्रा लिंक परियोजना के परिणाम स्वरूप आज का समय ऐसा है कि पूरे साल सदानीरा की तरह मां शिप्रा का जल है। मई के महीने में मैं स्नान करके बता रहा हूं कि पूरे साल यहां जल उपलब्ध है और जल ही जीवन है, जल से ही तीर्थ की महत्ता बढ़ती है। मां सब पर कृपा करें मां के आंचल में जब स्नान करने का मौका मिलता है तो क्षिप्रा स्नान करने के लिए जरूर आता हूं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन की पहचान मां क्षिप्रा से है, बाबा महाकाल की इस नगरी में और शिप्रा के तट पर हमारे सभी देवी-देवताओं का वास है। हमारी परंपरा है कि स्नान के बाद अपने तीर्थ की महत्ता बढ़ाएं। बड़ा दुख होता है कि कभी-कभी लोग मां क्षिप्रा पर प्रश्न करते हैं, हम सब जानते हैं कि यह मां का तट है, इसकी पवित्रता बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ऐसा माना जाता है कि मां क्षिप्रा के कारण ही बाबा महाकाल यहां अपना धाम बनाए हुए हैं। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां हर किसी के मन की मुराद पूरी होती है। दुनिया में बड़े से बड़े परिवर्तन जब कभी हुए हैं तो उज्जैन से उनका संबंध जरूर आता है। कल से यहां पंचकोशी की बड़ी परिक्रमा प्रारंभ होगी। इस परिक्रमा में लोग आस्था और श्रद्धा से आते हैं। सबके मन का विश्वास उज्जैन के अंदर बना रहे।

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