
भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। मुख्यमंत्री ने तय समय-सीमा के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति की अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
इस दौरान समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया मौजूद रहे। वहीं समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। मुख्यमंत्री ने उनका भी विशेष रूप से धन्यवाद दिया।
समिति द्वारा सौंपा गया प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है।
समिति ने अपनी अनुशंसाओं में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। यह सुझाव राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।
राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों सहित व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा। इसके साथ ही लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, पारंपरिक धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं का सम्मान बनाए रखने तथा संवैधानिक प्रावधानों और लोकनीति के अनुरूप सुझाव तैयार किए गए हैं।
समिति द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन राज्य शासन के विधि विभाग को भेज दिया गया है। अब विधेयक का आवश्यक परीक्षण और परिमार्जन किया जाएगा। इसके बाद वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने पर इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संभावना है कि समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक इसी मानसून सत्र में मध्यप्रदेश विधानसभा में पेश किया जा सकता है।
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