
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार (14 जुलाई) सुबह विधानसभा पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर कई अहम बातें कहीं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) पर गठित समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट उन्हें सौंप चुकी है। अब कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे यूसीसी का विषय हो या भोजशाला का मामला, कांग्रेस हर मुद्दे को केवल हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सभी धर्मों के लोगों ने यूसीसी पर खुलकर अपने सुझाव और विचार दिए हैं, लेकिन कांग्रेस अब तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है।
UCC की रिपोर्ट समिति द्वारा प्राप्त हुई है। इसे हम विधानसभा में प्रस्तुत करेंगे।
कांग्रेस ने UCC पर अपनी बात तक स्पष्ट करना उचित नहीं समझा, यह उनका दोहरा रवैया है।#UniformCivilCode #UCC pic.twitter.com/NxVrj1JYaY— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 14, 2026
गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। मुख्यमंत्री ने तय समय के भीतर प्रतिवेदन तैयार करने और सौंपने के लिए समिति के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया भी मौजूद रहे।
समिति की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट को तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं शामिल हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और मध्यप्रदेश में लागू विभिन्न कानूनों तथा सामाजिक प्रथाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में कुल 10 अध्याय शामिल किए गए हैं। दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। इसे मध्यप्रदेश में लागू मौजूदा कानूनों और नियमों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के तीसरे खंड में जन-परामर्श का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विश्लेषण शामिल है। समिति को कुल 9.58 लाख से अधिक सुझाव मिले। इनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार अध्ययन भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है। समिति ने अपनी सिफारिश में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने का सुझाव दिया है।
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