UIMR Update: CM मोहन यादव का मेगा प्लान, MP में 5 लाख नौकरी-16 हजार KM क्षेत्र में बड़ा बदलाव

Published : Jun 20, 2026, 01:25 PM IST
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सार

UIMR Explainer: इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर कितना बड़ा गेमचेंजर बनेगा? किसानों को 60% विकसित जमीन लौटाने वाला मॉडल कितना सफल होगा? क्या UIMR मध्यप्रदेश को विकसित भारत 2047 का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना सकता है?

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच के तहत यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) को मध्यप्रदेश के विकास का नया प्रवेश द्वार बनाने की तैयारी की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य इंदौर जैसे बड़े शहरों में केंद्रित विकास को आसपास के छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है। इसी सोच के तहत UIMR का दायरा छह गुना बढ़ाकर 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है।

अब इस क्षेत्र में इंदौर के साथ उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर सहित छह जिलों की 38 तहसीलें और 2,781 गांव शामिल होंगे। इस विस्तृत क्षेत्र में करीब सवा करोड़ लोग निवास करते हैं। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में मध्यप्रदेश की भूमिका को और मजबूत करेगी।

UIMR में 5 लाख रोजगार और बड़े औद्योगिक निवेश की तैयारी

मालवा क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए UIMR के अंतर्गत 13,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि का बड़ा औद्योगिक बैंक तैयार किया गया है। इसके साथ ही 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से करीब पांच लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इंजीनियरिंग उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। वहीं उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी को एंकर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। रतलाम को लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाकर निर्यात हब के रूप में स्थापित करने की योजना है।

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से 60 मिनट कनेक्टिविटी का लक्ष्य

UIMR की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक कनेक्टिविटी मॉडल है। सरकार का लक्ष्य पूरे 16 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 60 मिनट की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम किया जा रहा है। साथ ही उज्जैन तक मेट्रो विस्तार योजना के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा। इस क्षेत्र को दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे उद्योगों में तैयार उत्पाद कम समय में देश के प्रमुख बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे।

लैंड पूलिंग मॉडल में किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की आधारशिला रखकर विकास के नए अध्याय की शुरुआत की है। यह देश का एक अनूठा लैंड पूलिंग मॉडल माना जा रहा है, जिसमें 17 गांवों के किसानों को उनकी 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस दी जाएगी। इससे किसान केवल जमीन देने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि विकास प्रक्रिया के प्रत्यक्ष भागीदार बनेंगे। सरकार मल्टी-नोडल नेटवर्क मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत देवास, धार, मक्सी और शाजापुर जैसे शहरों को भी ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर पर बढ़ते जनसंख्या और संसाधनों के दबाव को कम किया जा सके।

ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी से पर्यावरण संरक्षण पर जोर

तेजी से हो रहे विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी लागू की गई है। इस नीति में ब्लू का अर्थ जल क्षेत्र और ग्रीन का अर्थ वन क्षेत्र है। नर्मदा नदी समेत अन्य जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के आसपास निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा जाएगा। साथ ही बड़े स्तर पर पौधारोपण को अनिवार्य बनाया जाएगा।

औद्योगिक क्षेत्रों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम लागू होगा ताकि नदियों और जल स्रोतों में प्रदूषित पानी न पहुंचे। भविष्य के औद्योगिक क्लस्टर कार्बन न्यूट्रल मॉडल पर आधारित होंगे और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे अक्षय स्रोतों का उपयोग करेंगे।

उज्जैन-ओंकारेश्वर टूरिज्म सर्किट से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

यह योजना विकास और विरासत के संतुलित मॉडल पर आधारित है। राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का योगदान राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत तक पहुंचाना है। उज्जैन में वर्ष 2023 के दौरान पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर एक विशेष लक्जरी टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। इसके साथ ग्रामीण पर्यटन, नर्मदा रिवरफ्रंट विकास और हेरिटेज होटल नेटवर्क को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

डेटा आधारित शहरी नियोजन से बनेगा भविष्य का मध्यप्रदेश

राज्य सरकार ने आधुनिक और वैज्ञानिक शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस कानून के तहत शहरों की योजना पारंपरिक तरीकों के बजाय डेटा आधारित विश्लेषण और जियोस्पेशियल तकनीक की मदद से तैयार की जाएगी।

इसके लिए एक सशक्त मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जिसके पास पूरे क्षेत्र की योजना बनाने और उसे लागू करने का वैधानिक अधिकार होगा। यह संस्था अगले 20 से 50 वर्षों की आबादी, यातायात और बुनियादी ढांचे की जरूरतों का पूर्व आकलन कर विकास कार्यों की अग्रिम तैयारी करेगी, जिससे भविष्य में अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या से बचा जा सके।

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