NCRB Report 2024: क्राइम रेट में यूपी राष्ट्रीय औसत से बेहतर, महिला सुरक्षा में बना देश का टॉप राज्य

Published : May 08, 2026, 01:33 PM IST
ncrb report 2024

सार

एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट राष्ट्रीय औसत से कम रहा है। महिला अपराधों में दोषसिद्धि दर 76.6% के साथ यूपी देश में शीर्ष पर है। हत्या, डकैती और महिला सुरक्षा मामलों में भी प्रदेश की स्थिति बेहतर बताई गई है।

लखनऊ। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में वर्ष 2024 के दौरान कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। देश की लगभग 17 प्रतिशत आबादी उत्तर प्रदेश में रहती है, लेकिन कुल अपराधों के मामले में राज्य का स्थान 18वां है।

NCRB Crime Rate क्या होता है और क्यों अहम है?

किसी भी राज्य में अपराध की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए क्राइम रेट को सबसे विश्वसनीय मानक माना जाता है। क्राइम रेट का मतलब प्रति एक लाख आबादी पर दर्ज अपराधों की संख्या से होता है। यह आंकड़ा राज्य की जनसंख्या और आकार के प्रभाव को संतुलित करता है, इसलिए अपराधों की तुलना के लिए इसे वैज्ञानिक और प्रामाणिक आधार माना जाता है।

हत्या, दुष्कर्म और डकैती जैसे अपराधों में यूपी की स्थिति

एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में कई गंभीर अपराधों में उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहतर रही है। हत्या के मामलों में उत्तर प्रदेश का स्थान 29वां है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में राज्य 26वें नंबर पर है। शीलभंग के मामलों में प्रदेश 20वें स्थान पर है। फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में यूपी देश में सबसे नीचे यानी 36वें स्थान पर है।

दुष्कर्म के मामलों में उत्तर प्रदेश 24वें स्थान पर है, जबकि बलवा मामलों में राज्य 19वें नंबर पर है। डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है। वहीं लूट के मामलों में प्रदेश 28वें और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 23वें स्थान पर है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में यूपी का स्थान 17वां है, जबकि बच्चों के खिलाफ अपराधों में राज्य 27वें नंबर पर है।

महिला अपराध मामलों में दोषसिद्धि दर में यूपी देश में सबसे आगे

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष पर पहुंच गया है। महिला अपराध मामलों में यूपी की दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो देश में सबसे अधिक है। दूसरे राज्यों की तुलना में यह आंकड़ा काफी बेहतर है। पश्चिम बंगाल में यह दर सिर्फ 1.6 प्रतिशत, कर्नाटक में 4.8 प्रतिशत, तेलंगाना में 14.8 प्रतिशत, केरल में 17 प्रतिशत, पंजाब में 19 प्रतिशत और तमिलनाडु में 23.4 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में महिला अपराध करने वालों के बच निकलने की संभावना काफी कम है।

गंभीर अपराध नियंत्रण में यूपी की स्थिति मजबूत

उत्तर प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर हत्या की दर केवल 1.3 दर्ज की गई है। यह तेलंगाना (2.7), झारखंड (3.7) और पंजाब (2.5) की तुलना में काफी कम है। प्रदेश के बड़े शहरों में भी जांच और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया तेज रही है। कानपुर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में चार्जशीट दर 84.4 प्रतिशत और लखनऊ में 83.7 प्रतिशत दर्ज की गई।

जेल प्रबंधन और महिला कैदियों के मामले में भी बेहतर स्थिति

जेलों में क्षमता और अनुशासन के मामले में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर बताई गई है। प्रदेश की महिला जेलों में अधिभोग दर केवल 36.7 प्रतिशत है, जिससे महिला कैदियों को बेहतर और व्यवस्थित वातावरण मिल रहा है। वहीं केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर 74.3 प्रतिशत है, जो पंजाब की 118.4 प्रतिशत और केरल की 149.9 प्रतिशत दर से काफी कम और बेहतर मानी जा रही है।

DGP राजीव कृष्ण ने बताया क्राइम रेट को सबसे बड़ा मानक

Rajeev Krishna ने कहा कि एनसीआरबी रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि राज्यों के बीच अपराध की तुलना के लिए क्राइम रेट ही सबसे वैज्ञानिक और सांख्यिकीय आधार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले यूपी का क्राइम रेट केवल 180.2 है, जो लगातार किए गए सुधारों और योजनाबद्ध प्रयासों का परिणाम है। डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की जीरो टॉलरेंस नीति अब जमीनी स्तर पर प्रभावी दिखाई दे रही है।

आधुनिक पुलिसिंग और सख्त कार्रवाई से मजबूत हुई कानून-व्यवस्था

डीजीपी के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में आधुनिक पुलिस स्टेशन, एंटी रोमियो स्क्वॉड, महिला हेल्प डेस्क, फास्ट ट्रैक कोर्ट और संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस हर छोटी-बड़ी शिकायत को गंभीरता से लेती है। डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों पर भी तुरंत कार्रवाई की जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें एफआईआर में बदला जाता है। डीजीपी ने कहा कि अधिक एफआईआर दर्ज होना एक संवेदनशील, पारदर्शी और लोगों के लिए सुलभ पुलिस व्यवस्था का संकेत है।

PREV

उत्तर प्रदेश में हो रही राजनीतिक हलचल, प्रशासनिक फैसले, धार्मिक स्थल अपडेट्स, अपराध और रोजगार समाचार सबसे पहले पाएं। वाराणसी, लखनऊ, नोएडा से लेकर गांव-कस्बों की हर रिपोर्ट के लिए UP News in Hindi सेक्शन देखें — भरोसेमंद और तेज़ अपडेट्स सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

UP Police SI Result 2026: 4543 पदों की भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी, 12,333 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल
UP News: योगी सरकार का भूसा संग्रह अभियान तेज, गो आश्रय स्थलों के लिए जुटाया जा रहा चारा