
लखनऊ। निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए योगी सरकार ने ‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के जरिए शिक्षा व्यवस्था में तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, ताकि सीखने की गुणवत्ता में सुधार हो सके और वास्तविक बदलाव देखने को मिले।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बदलाव का नेतृत्वकर्ता बनाना है। अब शिक्षक सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सीखने की प्रक्रिया को दिशा देने वाले मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को इस नई भूमिका के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है।
‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर में लागू किया गया है। इनमें चित्रकूट, सोनभद्र और बलरामपुर आकांक्षी जनपद हैं, जबकि गोरखपुर और सीतापुर में आकांक्षी विकासखंड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा सुधार को प्राथमिकता देते हुए इस मॉडल को लागू किया गया है।
कार्यक्रम के तहत 15 राज्य स्तरीय संदर्भ समूह (SRG) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन एसआरजी का दो दिवसीय प्रशिक्षण 15-16 अप्रैल को पूरा हुआ। ये प्रशिक्षित समूह तकनीक के माध्यम से अधिक से अधिक शिक्षकों से जुड़कर उन्हें नियमित शैक्षणिक मार्गदर्शन देंगे और कक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने में मदद करेंगे।
इस पहल के लागू होने से परिषदीय शिक्षक पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर तकनीक से जुड़ेंगे। उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, स्पष्ट दिशा और लगातार शैक्षणिक सहयोग मिलेगा। इससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणाम देने वाली बनेगी।
नई व्यवस्था में गतिविधि आधारित और स्तर के अनुसार पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे छात्र बिना किसी दबाव के सहज तरीके से सीख सकेंगे। इससे उनकी बुनियादी साक्षरता मजबूत होगी और उनका समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
इस मॉडल के तहत शिक्षकों और तकनीकी टीम के बीच संवाद को मजबूत किया गया है। पहले जहां दिन में 1 से 2 बार ही संपर्क हो पाता था, अब इसे बढ़ाकर 18 से 20 बार नियमित और योजनाबद्ध संवाद सुनिश्चित किया जाएगा। इससे शिक्षकों को जरूरत के अनुसार अधिक सटीक और उपयोगी मार्गदर्शन मिलेगा।
कार्यक्रम में कक्षा 2 के छात्रों की भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षकों को अतिरिक्त सहयोग दिया जा रहा है, ताकि शुरुआती स्तर पर ही छात्रों की मजबूत नींव तैयार हो सके और आगे के परिणाम बेहतर बनें।
यह तकनीक आधारित मॉडल फील्ड विजिट की आवश्यकता को कम करेगा, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों के शिक्षकों तक भी आसानी से पहुंच बनाई जा सकेगी।
इस कार्यक्रम के तहत उन स्कूलों और शिक्षकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां शैक्षणिक सहयोग कम है या प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में संतुलित सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
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