
लखनऊ। जिन परिवारों के लिए कभी अच्छी शिक्षा केवल एक सपना थी, वहां अब उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत योगी सरकार ने यह साबित किया है कि सरकारी योजनाएं अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीन पर असर दिखा रही हैं। वर्ष 2026-27 के लिए अब तक प्रदेश में 1,03,439 बच्चों का नामांकन हो चुका है, जिससे हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिली है। यह शुरुआती आंकड़े हैं और जैसे-जैसे नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
राज्य के कई जिलों में नामांकन तेजी से हुआ है। खासतौर पर लखनऊ, वाराणसी, बुलंदशहर और बदायूं जैसे जिले इस सूची में आगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
इन आंकड़ों से साफ है कि अभिभावकों का भरोसा इस योजना पर बढ़ रहा है और वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे आ रहे हैं।
सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिला है। अब ऐसे परिवारों के बच्चों को भी निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिल रहा है, जो पहले संभव नहीं था। इससे शिक्षा में समान अवसर मिल रहे हैं और समाज में संतुलित विकास की दिशा मजबूत हो रही है। यह पहल शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को भी बढ़ावा दे रही है।
योगी सरकार ने इस योजना को पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनाया है। ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रक्रिया के जरिए पात्र बच्चों का चयन बिना किसी भेदभाव के किया जा रहा है। यही कारण है कि लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, यह नामांकन प्रक्रिया जुलाई तक जारी रहेगी। इस दौरान और भी पात्र बच्चों को योजना से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चों को इस योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके।
RTE नामांकन में प्रदेश के टॉप 10 जिले इस प्रकार हैं:
| जनपद | नामांकन |
| लखनऊ | 7952 |
| वाराणसी | 4957 |
| बुलंदशहर | 4154 |
| बदायूं | 3599 |
| मुरादाबाद | 3246 |
| आगरा | 3086 |
| कानपुर नगर | 2476 |
| गोरखपुर | 2352 |
| अलीगढ़ | 2320 |
| गाजियाबाद | 2209 |
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