वीडियो डेस्क। एक शर्ट और नेकर पहने आप कई बार उन छोटूओं से मिलें होंगे। किसी ढाबे पर काम करते हुए आपके जूठे बर्तन भी उठाए होंगे या फिर कबाड़े की बोरियां उठाते इन बच्चों को जरूर देगा होगा। गरीबी इन्हें बचपन में ही कागज और कलम की जगह दो जून की रोटी का इंतजाम करने की जिम्मेदारी थमा देती है।
वीडियो डेस्क। एक शर्ट और नेकर पहने आप कई बार उन छोटूओं से मिलें होंगे। किसी ढाबे पर काम करते हुए आपके जूठे बर्तन भी उठाए होंगे या फिर कबाड़े की बोरियां उठाते इन बच्चों को जरूर देगा होगा। गरीबी इन्हें बचपन में ही कागज और कलम की जगह दो जून की रोटी का इंतजाम करने की जिम्मेदारी थमा देती है। इनके मां बाप भी मजबूरी में अपने बच्चों को मजदूरी के लिए भेज देते हैं। ये वे बच्चे हैं जो हमारे देश का भविष्य हैं। जो इस देश की दिशा और दशा तय करेंगे। भारत में बाल मजदूरी चरम पर है। काम करने वाले नाबालिगों को ना बचपन जीने का हक मिल पाता है ना ही अपने भविष्य को संवारने का मौका। बाल मजदरी से जुड़े ये 10 आंकड़े आपको हैरान कर देंगे।