Bachon Ki Nazar Kaise Utare Bihari Tarika: क्या बच्चे को नजर लग गई है? अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार या चिड़चिड़ा हो रहा है, तो जानिए बिहार का पारंपरिक नजर उतारने का तरीका, जो आज भी बच्चों की नजर उतारने के लिए अपनाया जाता है। पढ़ें आसान घरेलू टोटकों से बच्चों की नजर कैसे उतारें।

Bihar Nazar Utarne Ka Tarika: अगर आपका बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो गया है, बिना वजह रोता है या बार-बार बीमार पड़ रहा है, तो घर के बुजुर्ग अक्सर एक ही बात कहते हैं- नजर लग गई है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी नजर उतारने के कुछ देसी तरीके बेहद लोकप्रिय हैं। खास बात ये है कि ये तरीके सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि लोगों के अनुभव पर आधारित हैं, जिन्हें पीढ़ियों से अपनाया जा रहा है। जानिए बिहार का सबसे फेमस नजर उतारने का तरीका?

मिर्च-नमक उतारा

घर की महिलाएं सूखी लाल मिर्च, नमक और सरसों के दाने लेकर बच्चे के ऊपर से घुमाती हैं और फिर आग में डाल देती हैं। इसे लेकर मान्यता है कि अगर मिर्च जलने पर तीखी गंध नहीं आती, तो नजर गहरी मानी जाती है। आजकल इसे ऑब्जर्वेशन टेक्निक भी कहा जा रहा है।

सरसों तेल की बाती: देसी हीलिंग का अनोखा तरीका

रुई की बाती को सरसों के तेल में भिगोकर बच्चे के ऊपर से उतारा जाता है और फिर जलाया जाता है। नीचे रखे पानी में गिरती तेल की बूंदों की आवाज को लोग नजर उतरने का संकेत मानते हैं। यह भी माना जाता है कि तेल की जितनी ज्यादा बूंदें गिरती हैं, उतनी गहरी नजर लगी है। खास कर तुरंत जन्मे बच्चों की नजर उतारने के लिए यह तरीका रोज अपनाया जाता है। कई लोग इसे साउंड थेरेपी जैसा इफेक्ट भी बताते हैं, क्योंकि इससे घर का माहौल शांत होता है और बच्चे को भी आराम महसूस होता है।

शनिवार का चप्पल-झाड़ू टोटका: निगेटिविटी क्लीनिंग का देसी वर्जन

पुरानी चप्पल या झाड़ू से उतारा कर दरवाजे पर झाड़ना, इसे अब लोग नेगेटिव एनर्जी रिलीज के रूप में देखने लगे हैं। खासतौर पर शनिवार को यह ज्यादा किया जाता है।

मिट्टी और गाय की पूंछ का झाड़ा

ग्रामीण इलाकों में रास्ते की मिट्टी, नमक-मिर्च मिलाकर उतारा या गाय की पूंछ से झाड़ना आज भी आम है। यह सिर्फ उपाय नहीं, बल्कि प्रकृति और परंपरा से जुड़ाव का हिस्सा है।

काला धागा और टीका: नजर से बचाव की डेली शील्ड

बच्चों को काला धागा पहनाना और काजल का टीका लगाना नजर प्रोटेक्शन का सबसे आसान तरीका माना जाता है। आज भी शहरी-ग्रामीण परिवारों में यह ट्रेंड बना हुआ है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट मानते हैं कि ये सभी उपाय सीधे तौर पर मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं हैं, लेकिन इससे परिवार बच्चे पर ज्यादा ध्यान देता है, उसकी हालत को जल्दी नोटिस करता है और उसे इमोशनल सिक्योरिटी मिलती है। लेकिन ध्यान रखें कि अगर बच्चा लगातार रो रहा है, बुखार है या खाना नहीं खा रहा, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।