एथनॉल का मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है। हालांकि, स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथनॉल तैयार किया जा सकता है।

ऑटो डेस्क : पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और उसके चलते बढ़ते पॉल्यूशन से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। 29 अगस्त, 2023 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) देश में पूरी तरह से एथनॉल फ्यूल से चलने वाली कार (Ethanol Fuel Car) लॉन्च कर दिया है। गडकरी ने बताया, 'एथेनॉल के दाम 60 रुपए प्रति लीटर है। इसके इस्तेमाल से कार 15-20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज दे सकती है। पेट्रोल की तुलना में यह ईंधन काफी सस्ता है। आइए जानते हैं आखिर एथेनॉल क्या होता है, ये कैसे बनता है और किफायती होने के साथ यह कितना फायदेमंद है?

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एथेनॉल क्या होता है

एथेनॉल को एक तरह का अल्कोहल कह सकते हैं. यह स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथनॉल का मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है। हालांकि, स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथनॉल तैयार किया जा सकता है।

एथेनॉल कैसे बनता है

फर्स्ट जनरेशन एथनॉल- गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से तैयार किया जाता है।

सेकंड जनरेशन एथेनॉल- सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मैटेरियल्स जैसे- गेहूं-चावल की भूसी, भुट्टा यानी कॉर्नकॉब, वुडी बायोमास या बांस से बनता है।

थर्ड जनरेशन एथेनॉल- यह एलगी से तैयार किया जाता है। हालांकि, अभी इस पर काम चल रहा है।

एथेनॉल फ्यूल से क्या फायदे हैं

  • पेट्रोल में जब एथेनॉल मिलाकार फ्यूल की तरह इस्तेमाल करते हैं तो पॉल्यूशन कम करने में मदद मिलेगी।
  • एथेनॉल में 35% ऑक्सीजन पाया जाता है। इस फ्यूल से गाड़ियां 35% कम कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन करती हैं। सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन भी कम होता है।
  • अभी देश में ऑयल इम्पोर्ट पर 16 लाख करोड़ रुपए खर्च होता है। इस फ्यूल के इस्तेमाल से यह पैसा बच सकता है और अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।
  • एथेनॉल को मिलाकर जो पेट्रोल बनता है, उससे चलने वाली गाड़ी पेट्रोल के मुकाबले काफी कम हीट होती है। एथेनॉल में मौजूद अल्कोहल जल्दी उड़ जाता है, जिससे इंजन गर्म नहीं होता है।
  • कच्चे तेल के मुकाबले एथेनॉल ईंधन काफी सस्ता पड़ेगा। इससे महंगाई से भी राहत मिल सकती है।
  • जब एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ेगा तो गन्ने, मक्का और दूसरी फसलों की डिमांड भी बढ़ जाएगी। इससे किसानों की आमदनी भी तेजी से बढ़ेगी।
  • एथेनॉल के इस्तेमाल से चीनी मिलों को कमाई का नया रास्ता खुलेगा। एथेनॉल से अभी किसानों को 21,000 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है।

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