सीट बेल्ट (seat belt) को बहुत से लोग परेशानी समझते हैं, जबकि यह किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। कई रिसर्च से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह हर तरह के हादसे में जान बचा सकती है।

ऑटो डेस्क। उद्योगपति साइरस मिस्त्री की कार हादसे में मौत के बाद से सीट बेल्ट की जरूरत पर काफी बातें हो रहीं हैं। लोग सीट बेल्ट को परेशानी समझ पहनने से बचते हैं। कार में आगे की सीट पर बैठे लोग अगर सीट बेल्ट नहीं पहनें तो अलार्म बजता है। पुलिस भी चालान काटती है, लेकिन पीछे की सीट पर बैठा व्यक्ति सीट बेल्ट पहना है या नहीं इसपर कोई ध्यान नहीं देता। अभी तक कारों में पीछे की सीट बेल्ट के लिए अलार्म की भी व्यवस्था नहीं थी। 

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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पीछे की सीट पर बैठे पैसेंजर सीट बेल्ट नहीं लगाए तो अलार्म बजे यह जरूरी करने जा रहे हैं। सीट बेल्ट परेशानी नहीं, सुरक्षा कवच है। यह हर तरह के सड़क हादसों में लोगों की जान बचाती है। साइरस मिस्त्री की मौत मामले में भी इस बात की पुष्टि होती है। कार में दो लोग सवार थे। आगे की सीट पर बैठे दोनों लोगों ने सीट बेल्ट लगाया था, इसलिए उनकी जान बच गई, जबकि पीछे की सीट पर बैठे दो लोगों ने सीट बेल्ट नहीं लगाया था। यह उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।

जान बचाती है सीट बेल्ट
सीट बेल्ट हादसे के वक्त कार सवार लोगों की कितनी सुरक्षा करती है इसको लेकर कई रिसर्च हुए हैं। स्पेन में किए गए एक स्टडी में पाया गया कि कार हादसों में 24 फीसदी मौत की वजह कार सवार लोगों द्वारा सीट बेल्ट नहीं पहना जाना है। 2017 में नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन ने बताया था कि सीट बेल्ट के चलते 14955 लोगों की जान बची। इसी तरह 2020 में कार हादसों में जितने लोगों की मौत हुई उनमें से करीब 51 फीसदी की जान बचाई जा सकती थी अगर उन्होंने सीट बेल्ट पहना होता।

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भारत में पिछले 20 सालों में सड़कें काफी अच्छी हो गईं हैं। इन चौड़ी-चौड़ी और सपाट सड़कों पर कारें बेहद तेज रफ्तार से दौड़ती हैं, इसके चलते सीट बेल्ट की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है। टक्कर के वक्त सीट बेल्ट पैसेंजर को कार में आगे की ओर उछलने से रोकता है। इससे सिर और चेहरे पर लगने वाले जानलेवा चोट से बचाव होता है। कहाने द्वारा 2015 में की गई स्टडी के अनुसार सीट बेल्ट हादसे में लोगों के गंभीर रूप से घायल होने से मामले को 50 फीसदी तक कम कर देती है।

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