Suzuki India Manufacturing: Suzuki ने 2030 या उसके बाद तक भारत में हर साल करीब 40 लाख कारें बनाने का लक्ष्य रखा। 2025 में कंपनी ने 35.3 लाख गाड़ियां बनाईं, जिनमें 23.5 लाख भारत से। Hansalpur से कुल क्षमता 29 लाख, Kharkhoda–Sanand पर विस्तार। इलेक्ट्रिक के साथ हाइब्रिड, CNG, CBG पर फोकस; 561 करोड़ का प्रावधान।

Maruti Suzuki Production Capacity: भारत को अपने वैश्विक विनिर्माण केंद्र के तौर पर आगे बढ़ाते हुए Suzuki ने बड़ा उत्पादन लक्ष्य तय किया है। कंपनी की योजना 2030 या उसके बाद तक भारत में हर साल करीब 40 लाख गाड़ियां बनाने की है। इसके साथ भारत की भूमिका केवल घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां बने वाहनों को दुनियाभर के बाजारों तक पहुंचाने पर भी जोर रहेगा।

Suzuki अगले दशक में उत्पादन बढ़ाने के साथ कई तरह की वाहन तकनीकों पर एक साथ काम कर रही है। कंपनी का फोकस पेट्रोल, CNG, हाइब्रिड, बायोगैस यानी CBG और इलेक्ट्रिक वाहनों को साथ लेकर चलने पर है। इसका मकसद अलग-अलग बाजारों और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक विकल्प उपलब्ध कराना है।

भारत बना Suzuki का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र

भारत पहले ही Suzuki के वैश्विक उत्पादन में अहम भूमिका निभा रहा है। 2025 में Suzuki ने दुनियाभर में करीब 35.3 लाख वाहन बनाए थे। इनमें लगभग 23.5 लाख वाहनों का उत्पादन भारत में हुआ। भारत में बने वाहनों की मांग जापान, यूरोप और अफ्रीका जैसे बाजारों में भी बढ़ रही है।

निर्यात में लगातार बढ़ोतरी ने भारत को Suzuki की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। यही आधार कंपनी के 2030 के बड़े उत्पादन लक्ष्य के पीछे भी है।

Hansalpur से Kharkhoda और Sanand तक बढ़ेगा उत्पादन

गुजरात के Hansalpur प्लांट में नई उत्पादन लाइन शुरू होने के बाद Maruti Suzuki की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 29 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। Hansalpur की खासियत यह है कि एक ही साइट पर सालाना 10 लाख वाहनों के उत्पादन की क्षमता विकसित की गई है।

इसके अलावा हरियाणा के Kharkhoda प्लांट में उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 10 लाख यूनिट सालाना करने की योजना है। गुजरात के Sanand में भी नया प्लांट तैयार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के जरिए कंपनी 2030 के आसपास 40 लाख वाहन सालाना उत्पादन के लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहती है।

इलेक्ट्रिक के साथ हाइब्रिड और पेट्रोल पर भी जोर

Suzuki की रणनीति केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है। कंपनी इलेक्ट्रिक कारों के साथ हाइब्रिड, CNG और पेट्रोल तकनीक को भी आगे बढ़ा रही है।

कंपनी ‘सुपर एने चार्ज’ जैसी हाइब्रिड तकनीक, हल्के वाहन ढांचे और नए टर्बो-पेट्रोल इंजन पर भी काम कर रही है। Suzuki का मानना है कि अलग-अलग देशों में चार्जिंग ढांचे, ईंधन की कीमत और ग्राहकों की जरूरत अलग होती है। ऐसे में कई तकनीकी विकल्प कंपनी को अलग-अलग बाजारों के लिए लचीला बनाएंगे।

गोबर से CBG, ईंधन के साथ खाद भी तैयार

बायोगैस यानी CBG के क्षेत्र में भी Suzuki ने अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। कंपनी भारत में तीसरे CBG प्लांट तक पहुंच चुकी है, जहां मवेशियों के गोबर से बायोगैस तैयार की जाती है। इस गैस को वाहन ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है।

इस प्रक्रिया से निकलने वाले अवशेष का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। Maruti Suzuki ने CBG से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 561 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया है।

भारत से दुनिया तक बढ़ेगा Suzuki का कारोबार

उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए प्लांट लगाने और पेट्रोल से लेकर इलेक्ट्रिक व CBG तक कई तकनीकों पर काम करने के साथ Suzuki भारत को अपने वैश्विक कारोबार के केंद्र में ला रही है। आने वाले वर्षों में भारत से घरेलू बिक्री के साथ-साथ निर्यात को बढ़ाने पर भी कंपनी का बड़ा फोकस रहेगा।