Trump Administration: अमेरिका में ट्रंप सरकार गाड़ियों के माइलेज नियमों में बड़ी छूट देने जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे नई कारों की कीमत करीब 1.25 लाख रुपये तक कम हो जाएगी। हालांकि, पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे प्रदूषण और पेट्रोल का खर्च दोनों बढ़ेंगे।

Car Mileage Rules: ट्रंप सरकार अमेरिका के कार बाजार में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने 28 सितंबर को गाड़ियों के माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से नई कारों के दाम घटेंगे और एक गाड़ी पर औसतन 1,300 डॉलर (करीब 1.25 लाख रुपये) की बचत होगी। सरकार का मानना है कि 'आजादी का मतलब सस्ती कारें हैं'। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पहले से ही काफी ज्यादा हैं।

माइलेज के नियमों में बड़ा बदलाव

कार कंपनियों के लिए माइलेज के नियमों में यह सबसे बड़ा बदलाव है। बाइडेन सरकार के पुराने नियमों के मुताबिक, 2031 तक गाड़ियों का औसत माइलेज 50 मील प्रति गैलन से ज्यादा होना जरूरी था। लेकिन नए प्रस्ताव के बाद यह घटकर 35 मील प्रति गैलन से नीचे आ सकता है। अगर इसे भारतीय हिसाब से समझें, तो यह नियम 21 किलोमीटर प्रति लीटर से घटाकर करीब 15 किलोमीटर प्रति लीटर करने जैसा है।

क्या सच में 1.25 लाख रुपये सस्ती होंगी कारें?

ट्रंप सरकार का कहना है कि नियमों में ढील देने से कार कंपनियों का खर्च कम होगा और इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। सरकार के अनुमान के मुताबिक, लंबे समय में एक नई कार की कीमत औसतन 1,300 डॉलर तक कम हो जाएगी। अमेरिकी परिवहन विभाग का दावा है कि अगले पांच सालों में अमेरिकी ग्राहकों के करीब 138 अरब डॉलर बचेंगे। यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब पिछले महीने अमेरिका में नई गाड़ी की औसत कीमत करीब 50,000 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।

महंगी कारों की जगह चुनने की ज्यादा आजादी?

ट्रंप सरकार की दलील है कि पुराने नियमों की वजह से कार कंपनियों पर महंगी तकनीक और इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV) बनाने का भारी दबाव था। अधिकारियों का कहना है कि नए बदलावों से ग्राहकों को अपनी पसंद की गाड़ी चुनने की ज्यादा आजादी मिलेगी। अमेरिकी परिवहन सचिव शॉन डफी ने इस कदम को 'गैर-जरूरी शर्तों' को खत्म करने वाला बताया है। सरकार को उम्मीद है कि कारें सस्ती होने से अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री और वहां काम करने वाले मजदूरों के लिए निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

पेट्रोल का खर्च और प्रदूषण बढ़ने की चेतावनी

दूसरी तरफ, पर्यावरण संगठनों ने इस नए फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि कार खरीदते वक्त जो चंद सौ डॉलर की बचत होगी, वह बाद में महंगे पेट्रोल के खर्च में डूब जाएगी। आलोचकों का कहना है कि कम माइलेज वाली गाड़ियां ज्यादा पेट्रोल पीएंगी, जिससे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन बढ़ने का खतरा है। कुल मिलाकर, ग्राहकों को असल में कितना फायदा होगा, यह कार कंपनियों की कीमतों और भविष्य में पेट्रोल के रेट पर ही निर्भर करेगा।