जैसे ही बेटी होनी की खबर पिता को लगी वह भड़क गया। पत्नी को साथ ले जाने और नवजात को अपनाने से इनकार कर दिया। उसने अपनी पत्नी को धमकी दी कि अगर वो नवजात बच्ची को लेकर घर लौटी तो वो उसकी हत्या कर देगा। 

पश्चिम चंपारण : समाज में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के नारे तो लग रहे हैं लेकिन कुछ लोगों की सोच आज भी नहीं बदली है। नवरात्र (navratri 2021) पर्व के दौरान बिहार (bihar) के पश्चिम चंपारण (Pashchim Champaran) जिले में समाज को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। बगहा के शास्त्री नगर पोखरा टोला की रीता देवी ने मंगलवार को एक बच्ची को जन्म दिया। जैसे ही ये खबर पति प्रदीप साहनी तक पहुंची, वह तिलमिला उठा। उसने मां और नवजात को घर ले जाने से इनकार कर दिया। महिला काफी देर तक पति के इंतजार में अस्पताल में ही बैठी रही लेकिन वह नहीं आया।

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जान देने की कोशिश
जब आस-पास के लोग प्रदीप को समझाने गए तो वो आत्महत्या करने गांव के तालाब में कूद गया। ग्रामीणों ने उसे बाहर निकाला और काफी समझाया लेकिन वह नहीं मान रहा था। उसका कहना था कि बेटे की चाहत में उसकी पत्नी ने चौथी बार बेटी को जन्म दिया है। अब वह उसे नहीं अपना सकता। बेटे के बिना उसकी दुनिया कैसी होगी। गांव वालों ने उसे बार-बार समझाया लेकिन वह नहीं माना। 

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दादी का दिल भी नहीं पसीजा
मां के साथ अस्पताल पहुंचे प्रदीप को देखकर उसकी पत्नी गीता को लगा कि फूल सी बेटी को देखकर उसके पति का सारा गुस्सा ठंडा हो जाएगा। लेकिन यहां भी प्रदीप हंगामा करने लगा और बेटी को ले जाने से मना कर दिया। प्रदीप के साथ उसकी मां ने भी पोती को अपनाने से इनकार कर दिया। इस दौरान बच्ची की मां रीता देवी फूट-फूटकर रो रही थी लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। हालांकि घंटों तक ड्रामा करने और अस्पताल प्रबंधन की कड़ाई के बाद महिला की सास बुधवार की दोपहर उसे और उसकी बेटी को अपने साथ ले गई। वहीं, बच्ची की मां अभी भी डरी सहमी है।

पांच साल पहले हुई है शादी
रीता देवी की शादी प्रदीप साहनी से पांच साल पहले हुई थी। शादी के इन सालों में महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया, तीनों बार उसे बेटी पैदा हुई। हालांकि इनमें से एक लड़की की मौत हो गई थी। यह चौथी बार है जब महिला ने बच्ची को जन्म दिया। मंगलवार की शाम को डिलीवरी होने के बाद महिला अस्पताल में बैठी अपने पति का राह देखती रही। उसका कहना है कि बच्ची का लालन पालन वो कर लेगी, लेकिन इसके बावजूद परिजन उसे ले जाने से मना करते रहे।

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