सुशील मोदी ने चारा घोटाले की सजा काट रहे लालू को अपने कार्यकाल की याद दिलाने के लिए अजय देवगन की दो फिल्म गंगाजल और अपहरण देखने की सलाह दी थी।

पटना। लॉकडाउन के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और मौजूदा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बीच ट्विटर पर सियासी जंग छिड़ गई है। दोनों एक-दूसरे के खिलाफ ट्वीट कर तंज कस रहे हैं। बीते दिनों सुशील मोदी ने चारा घोटाले की सजा काट रहे लालू को अपने कार्यकाल की याद दिलाने के लिए अजय देवगन की दो फिल्म गंगाजल और अपहरण देखने की सलाह दी थी। इसके बाद लालू ने ट्वीट करते हुए नीतीश सरकार से 15 साल का हिसाब मांगा है। 

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अब सुशील मोदी ने लालू प्रसाद यादव को सामाजिक उनके संतुलन का सूत्र वाक्य - भूरा बाल साफ करो की याद दिलाई। उल्लेखनीय हो कि लालू इस समय चारा घोटाले की सजा रांची जेल में काट रहे हैं। हालांकि तबियत खराब होने के कारण वो रिम्स में एडमिट हैं। जेल की सजा और हॉस्पिटल में एडमिट होने के बाद भी उनके ट्विटर हैंडल से विभिन्न समसायमिक मुद्दों पर बिहार सरकार को घेरने वाले ट्वीट आते रहते हैं। 

लालू के ट्वीट में क्या था?

लालू के हैंडल से एक ट्वीट में लिखा, बिहार सरकार अपना, नैतिक, प्राकृतिक, आर्थिक, तार्किक, मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, व्यवहारिक, न्यायिक, जनतांत्रिक और संवैधानिक चरित्र एवं संतुलन पूरी तरह खो चुकी है। लोकलाज तो कभी रही ही नहीं, लेकिन जनादेश डकैती का तो सम्मान रख लेते। 15 बरस का हिसाब देने में कौनो दिक्कत बा?

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जेल से ज्ञान देना बंद करें लालू 
लालू के इस ट्वीट का जवाब देते हुए सुशील मोदी ने लिखा कि लालू-राबड़ी राज में नैतिकता को ताक पर रख कर चारा-अलकतरा घोटाले किए गए। सड़क, बिजली, सिंचाई के विकास की उपेक्षा करना और अपहरण उद्योग को संरक्षण देना उनकी महान आर्थिक नीति का आधार था। "लालूनानिक्स" में कालेधन से रंगभेद नहीं किया जाता था। सामाजिक संतुलन का सूत्र वाक्य था- भूरा बाल साफ करो। लोकलाज का आदर्श तो तब स्थापित हुआ, जब चारा घोटाला में जेल जाने की नौबत आने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तमाम वरिष्ठ नेताओं को धकिया कर अपनी पत्नी को खड़ाऊं मुख्यमंत्री बनवा दिया। जिन्होंने संविधान, लोकलाज और राजधर्म की मर्यादाएं तोड़ीं, वे जेल से ज्ञान दे रहे हैं। 

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