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क्रूज ड्रग्स केस: Aryan Khan को राहत, Bombay HC ने कहा-आरोपी साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं

इस साल अक्टूबर में एक क्रूज पर छापेमारी के दौरान एनसीबी ने आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को हिरासत में लिया था। हिरासत के एक दिन बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) से मिली बेल का ऑर्डर शनिवार को सार्वजनिक कर दिया गया।

Aryan khan drug case No evidence of conspiracy found against Shah Rukh Khans son says  Bombay HC NTP
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Mumbai, First Published Nov 20, 2021, 5:49 PM IST
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मुंबई. बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) से मिली बेल का ऑर्डर शनिवार को सार्वजनिक कर दिया गया। बेल ऑर्डर के साथ कोर्ट ने 14 पन्नों का आदेश देते हुए साफ कर दिया है कि आर्यन और उनके साथियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। 26 हिरासत में रहे एक्टर के बेटे को एक बड़ी राहत मिली है। इनके खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पास कोई सबूत ही नहीं था। 

26 दिन तक आर्यन रहें  सलाखों के पीछे 

बता दें कि इस साल अक्टूबर में एक क्रूज पर छापेमारी के दौरान एनसीबी ने आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को हिरासत में लिया था। हिरातस के एक दिन बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। 26 दिनों तक आर्यन जेल के अंदर रहे। काफी कोशिशों के बाद इन्हें जमानत मिली। 

आर्यन के पास नहीं मिला कोई आपत्तिजनक पदार्थ

कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया कि आर्यन खान के पास से कोई भी नशीला पदार्थ नहीं मिला है और इस तथ्य पर कोई विवाद भी नहीं है। मर्चेंट और धमेचा के पास से अवैध मादक पदार्थ पाया गया, जिसकी मात्रा बेहद कम थी।  आदेश के मुताबिक, 'अदालत को ऐसे मामलों में पहले यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि क्या इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि वह प्रथम दृष्टया यह तय कर सके कि आवेदकों (आर्यन खान, मर्चेंट और धमेचा) ने साजिश रची और यह कि अभियोजन एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के प्रावधान लगाने में सही है।'

इस प्रकार के अपराध में सजा एक वर्ष से अधिक नहीं है

न्यायमूर्ति सांब्रे ने ये भी कहा कि कोर्ट को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत होती है कि आरोपियों के खिलाफ साजिश का मामला साबित करने के लिए साक्ष्य के तौर पर कुछ सामग्री मौजूद हो।केवल इसलिए कि आवेदक क्रूज पर यात्रा कर रहे थे, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के प्रावधान लगाने को संतोषजनक आधार नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभियोजन के मामले पर गौर किया भी जाए तो भी इस प्रकार के अपराध में सजा एक वर्ष से अधिक नहीं है।

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