PCOD और PCOS महिलाओं में हार्मोनल गड़बड़ी, अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना और बाल झड़ने की बड़ी वजह हैं। सही होम्योपैथी इलाज, संतुलित डाइट और लाइफस्टाइल बदलाव से इन समस्याओं को अंदर से कंट्रोल किया जा सकता है और शरीर का नैचुरल बैलेंस सुधारा जा सकता है।
आजकल बहुत सी भारतीय लड़कियाँ और महिलाएँ पीसीओडी और पीसीओएस से परेशान हैं। कभी पीरियड्स टाइम पर नहीं आते, कभी बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होती है, चेहरे पर पिंपल्स निकल आते हैं, वजन बढ़ जाता है और बाल भी झड़ने लगते हैं। ऐसे में दिल घबराता है और लगता है कि ज़िंदगी भर दवाई खानी पड़ेगी। लेकिन सही इलाज और सही जानकारी के साथ इस समस्या को जड़ से कंट्रोल किया जा सकता है, दबाना ही नहीं, धीरे–धीरे ठीक करने की कोशिश की जा सकती है।
पीसीओडी और पीसीओएस में फर्क क्या है?
बहुत लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनमें हल्का सा फर्क होता है।
- पीसीओडी में ओवरी के अंदर छोटे–छोटे सिस्ट बन जाते हैं और एग्स पूरी तरह मैच्योर नहीं हो पाते।
- पीसीओएस एक बड़ा सिंड्रोम है, जिसमें हॉरमोन बहुत ज़्यादा गड़बड़ा जाते हैं, पीरियड्स गड़बड़ होते हैं, वजन बढ़ता है, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आ सकते हैं और प्रेग्नेंसी में भी दिक्कत हो सकती है।
दोनों ही हालात में शरीर के अंदर हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, इसीलिए इलाज ऐसा होना चाहिए जो अंदर से बैलेंस को ठीक करे, सिर्फ़ ऊपर–ऊपर से नहीं।
पीसीओडी-पीसीओएस के आम लक्षण जो नज़रअंदाज़ नहीं करने चाहिए
अगर नीचे दिए गए लक्षण बार–बार दिख रहे हों, तो ये पीसीओडी या पीसीओएस का इशारा हो सकते हैं:
- पीरियड्स का हर बार लेट होना या कई–कई महीने तक पीरियड्स न आना
- बहुत ज़्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग होना
- चेहरे पर बार–बार पिंपल्स निकलना, खासकर ठुड्डी और जबड़े के पास
- चेहरे, ठुड्डी, पेट या छाती पर मोटे, काले बाल आना
- सिर के बाल पतले होना, झड़ना या बीच से खाली होना
- जल्दी थकान, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, हल्का डिप्रेशन जैसा महसूस होना
ऐसे समय पर इसे “बस स्ट्रेस होगा” कहकर टाल देना ठीक नहीं है। जितनी जल्दी समझेंगे, उतनी जल्दी कंट्रोल में लाया जा सकता है।
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के लिए होम्योपैथी दवा क्यों?
बहुत सारी ऑलोपैथिक दवाएँ तुरंत असर दिखाती हैं, लेकिन अक्सर उनमें हार्मोनल पिल्स, स्टेरॉइड या ऐसी दवाएँ होती हैं जिन्हें लंबे समय तक लेना मुश्किल हो जाता है। दवा बंद करने पर कई महिलाओं को लगता है कि सारी दिक्कतें वापस लौट आईं।
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के लिए होम्योपैथी दवा की खासियत यह है कि यह शरीर के अपने नेचुरल सिस्टम के साथ काम करती है। होम्योपैथी में:
- आपकी पूरी हिस्ट्री सुनी जाती है – पीरियड्स पैटर्न, वजन, स्ट्रेस, खाने–पीने की आदतें, नींद, परिवार में किसी को ऐसी दिक्कत है या नहीं।
- उसके बाद आपकी बॉडी और नेचर के हिसाब से दवा चुनी जाती है।
- दवा का लक्ष्य सिर्फ़ पीरियड्स लाना नहीं, बल्कि हॉरमोन को नैचुरली बैलेंस करना होता है।
इससे धीरे-धीरे पीरियड्स नियमित हो सकते हैं, पिंपल्स और अनचाहे बाल कम हो सकते हैं और शरीर थोड़ा हल्का व एनर्जी से भरा महसूस करने लगता है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होम्योपैथी दवा और बाल झड़ने की समस्या
पीसीओएस में कई महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता बाल झड़ना होता है। हार्मोन बिगड़ने से एक पुरुष हार्मोन DHT बढ़ जाता है, जो हेयर फॉलिकल को कमजोर कर देता है। इससे सिर के ऊपर से बाल पतले होना, बीच से स्कैल्प दिखना और बहुत ज़्यादा हेयर फॉल होना शुरू हो सकता है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम होम्योपैथी दवा इस जगह मदद कर सकती है, क्योंकि:
- यह हार्मोनल इम्बैलेंस को धीरे–धीरे ठीक करने की कोशिश करती है।
- DHT के असर को कम कर के जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करती है।
- साथ में अगर डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए, तो बालों की पकड़ मजबूत होने लगती है।
होम्योपैथी के साथ अगर आयरन, प्रोटीन, और ज़िंक जैसे न्यूट्रिएंट्स का ध्यान रखा जाए, तो बालों की क्वॉलिटी भी बेहतर हो सकती है।
लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव, बड़े फायदे
दवा के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतें बदलना बहुत ज़रूरी है, वरना असर अधूरा रह जाता है।
- रोज कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना, योग या कोई भी एक्सरसाइज़ करना
- मीठा, कोल्ड ड्रिंक, ज्यादा मैदा और तले–भुने खाने को कम करना
- जंक फूड की जगह घर का बना सादा खाना, दाल, सब्ज़ी, सलाद, फल
- रात को देर तक मोबाइल पर जागने की जगह समय पर सोना
- ज़्यादा स्ट्रेस हो तो प्राणायाम, मेडिटेशन, या किसी से बात करके मन हल्का करना
ये सब चीज़ें होम्योपैथिक इलाज के साथ मिलकर पीसीओडी–पीसीओएस को कंट्रोल करने में बहुत मदद करती हैं।
कब ज़रूर डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
नीचे की स्थितियों में इंतज़ार न करके तुरंत किसी अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर या गाइनेकोलॉजिस्ट से मिलना ज़रूरी है:
- 3-4 महीने से ज़्यादा समय से पीरियड्स न आए हों
- बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या बहुत कम ब्लीडिंग हो
- चेहरे या शरीर पर अचानक बहुत ज़्यादा बाल आ रहे हों
- बाल तेज़ी से झड़ रहे हों या पैचेस बन रहे हों
- कई महीने से प्रेग्नेंसी की कोशिश हो रही हो लेकिन प्रॉब्लम आ रही हो
समय पर शुरू की गई पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के लिए होम्योपैथी दवा और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, होम्योपैथी दवा आपके शरीर को अंदर से ठीक करने का मौका देती है। धैर्य, सही डाक्टर और थोड़े लाइफस्टाइल बदलाव के साथ, पीसीओडी और पीसीओएस को कंट्रोल करना बिल्कुल संभव है।
