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10 मिनट में डिलीवरी अब नहीं! Blinkit, जोमैटो और स्विगी ने बंद की सर्विस, जानिए क्यों

10 Minute Delivery Stopped: देश की फूड और ग्रॉसरी डिलीवरी कंपनियों जेप्टो, स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट ने अब 10 मिनट डिलीवरी सर्विस बंद कर दी है। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ हुई बातचीत के बाद यह कदम उठाया गया। 

3 Min read
Author : Satyam Bhardwaj
| Updated : Jan 13 2026, 03:23 PM IST
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Image Credit : Getty

ब्लिंकिट अब 10 मिनट में डिलीवरी नहीं करेगी

देश में 10 मिनट में डिलीवरी का ट्रेंड शुरू करने वाली ब्लिंकिट (Blinkit) अब अपने इसी टैगलाइन से दूरी बनाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की दखल और गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद ब्लिंकिट अपने सभी प्लेटफॉर्म से '10 मिनट डिलीवरी' वाला ब्रांडिंग मैसेज हटाने की तैयारी में है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दिसंबर के आखिर में देशभर में डिलीवरी पार्टनर्स ने काम की हालत, ज्यादा दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी को लेकर हड़ताल की थी।

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Image Credit : Getty

क्यों सरकार को करना पड़ा हस्तक्षेप?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की पहल इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बनी है। सरकार को यह चिंता थी कि फिक्स्ड डिलीवरी टाइम जैसे '10 मिनट' या '15 मिनट' के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर बेवजह का दबाव डालते हैं। सरकार का मानना है कि चाहे कंपनियां यह दावा करें कि उनकी डिलीवरी नजदीकी स्टोर्स और टेक्नोलॉजी की वजह से तेज होती है, लेकिन पब्लिक मैसेजिंग में तय समय सीमा डिलीवरी बॉय को रिस्क लेने के लिए मजबूर कर सकती है।

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Image Credit : Getty

Blinkit ने कहा ब्रांडिंग बदलेगी, सर्विस नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लिंकिट अपने सभी ऐड्स, प्रमोशनल कैंपेन और सोशल मीडिया पोस्ट्स से '10 मिनट डिलीवरी' का जिक्र हटाएगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डिलीवरी स्लो हो जाएगी। असल में कंपनियां अब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर फिक्स टाइम का वादा करने से बचेंगी, ताकि यह न लगे कि डिलीवरी पार्टनर्स को तेज चलने या ट्रैफिक नियम तोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डिलीवरी सिस्टम पहले जैसा ही रहेगा, फर्क सिर्फ मैसेजिंग का होगा।

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Image Credit : twitter

ब्लिंकिट ही नहीं, पूरे सेक्टर पर असर

यह फैसला सिर्फ ब्लिंकिट तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रम मंत्री ने जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक की। इन बैठकों में साफ कहा गया कि ब्रांडिंग और मार्केटिंग से फिक्स्ड डिलीवरी टाइम हटाई जाएं। सभी कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि वे अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया से डिलीवरी टाइम कमिटमेंट हटाएंगी।

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Image Credit : Getty

गिर वर्कर की स्ट्राइक क्यों हुई थी?

25 और 31 दिसंबर को देशभर में गिग और डिलीवरी वर्कर्स ने हड़ताल का आह्वान किया था। यूनियनों का आरोप था कि प्लेटफॉर्म्स असुरक्षित डिलीवरी मॉडल को बढ़ावा दे रहे हैं, कमाई घट रही है और सोशल सिक्योरिटी नाम की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। हालांकि, न्यू ईयर ईव पर कई शहरों में डिलीवरी सामान्य रही, लेकिन इस हड़ताल ने अल्ट्रा फास्ट डिलीवरी और वर्कर सेफ्टी की बहस को फिर से तेज कर दिया। इससे पहले जोमैटो के CEO दीपिंदर गोयल समेत कई फाउंडर्स ने तेज डिलीवरी मॉडल का बचाव किया था। उनका कहना था कि यह सिस्टम डिजाइन और स्टोर लोकेशन की वजह से संभव होता है, न कि डिलीवरी पार्टनर पर दबाव डालकर। लेकिन सरकार की हालिया दखल यह दिखाती है कि अब पब्लिक स्टैंड में थोड़ा संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है।

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

About the Author

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Satyam Bhardwaj
सत्यम भारद्वाज। 2017 से जर्नलिज्म की फील्ड में काम कर रहे हैं, 8 साल का अनुभव। अक्टूबर 2021 से एशियानेट न्यूज हिंदी से जुड़कर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल की है। पॉलिटिकल न्यूज, नेशनल न्यूज, बिजनेस-टेक और ऑटो, क्राइम और फीचर स्टोरीज में खास इंट्रेस्ट है। अलग-अलग मीडिया इंस्टीट्यूशन और कई पब्लिक रिपोर्ट्स बनाने का अनुभव।
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