EPFO ने नई EPF Scheme 2026 के तहत बड़ा बदलाव किया है। अब PF खाते से निकासी के बाद कम से कम 25% राशि रखना अनिवार्य होगा। जानिए नया नियम क्यों लागू किया गया, किसे मिलेगा फायदा और रिटायरमेंट सेविंग्स पर इसका क्या असर पड़ेगा।
EPFO News: नौकरी के दौरान पीएफ (Provident Fund) को ज्यादातर लोग सिर्फ जरूरत पड़ने पर निकाले जाने वाले पैसे के रूप में देखते हैं। लेकिन यही सोच कई कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के समय परेशानी बन रही है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी रिटायरमेंट तक अपने पीएफ खाते में बहुत कम राशि बचा पा रहे हैं। इसी स्थिति को बदलने के लिए EPFO ने नई EPF Scheme 2026 के तहत एक अहम बदलाव किया है।
रिटायरमेंट पर क्यों बच रहे थे सिर्फ 10-20 हजार रुपये?
EPFO के मुताबिक, अंतिम भुगतान के समय करीब 48.7 प्रतिशत कर्मचारियों के पीएफ खाते में केवल 10,000 से 20,000 रुपये ही शेष रह जाते थे। इसका मतलब है कि नौकरी के दौरान बार-बार निकासी करने की वजह से रिटायरमेंट के समय आर्थिक सुरक्षा काफी कमजोर हो जाती थी।
इसी समस्या को देखते हुए EPFO ने नई व्यवस्था लागू की है, ताकि कर्मचारी जरूरत के समय भी पैसा निकाल सकें और भविष्य के लिए पर्याप्त बचत भी बनी रहे।
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नई EPF Scheme 2026 में क्या बदला?
1 जुलाई 2026 से लागू नई EPF Scheme में निकासी के नियमों को आसान बनाया गया है। अब कर्मचारी 12 महीने की नौकरी पूरी होने के बाद बीमारी, शिक्षा, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए पीएफ से रकम निकाल सकते हैं।
हालांकि, नया नियम यह भी कहता है कि पीएफ खाते में कुल जमा राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा रखना अनिवार्य होगा। यानी कर्मचारी पूरी रकम खाली नहीं कर पाएंगे। इसका उद्देश्य रिटायरमेंट के लिए न्यूनतम बचत सुनिश्चित करना है।
75% निकासी के बाद भी लाखों रुपये बचेंगे
EPFO ने उदाहरण देकर बताया कि यदि कोई कर्मचारी 20 साल तक 15,000 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी करता है, तो उसके पीएफ खाते में लगभग 14 लाख रुपये जमा हो सकते हैं।
अगर वह बीच में 75 प्रतिशत राशि निकाल भी ले, तब भी उसके खाते में करीब 3.5 लाख रुपये बचेंगे। संगठन का मानना है कि इस बदलाव से कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत पहले की तुलना में 7 से 35 गुना तक अधिक हो सकती है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को दोहरा लाभ देना है,जरूरत के समय पीएफ से निकासी भी आसान रहे और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त राशि भी खाते में बनी रहे। इससे भविष्य की वित्तीय योजना पहले के मुकाबले अधिक मजबूत हो सकेगी।
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