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Old Gold Selling Tips: पुराना सोना बेचने जा रहे हैं? ये 5 गलतियां की तो हजारों नहीं, लाखों का नुकसान!
Gold Selling 5 Big Mistakes: सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं। कई लोग घर में रखी पुरानी ज्वैलरी बेचने या एक्सचेंज करने की सोच रहे हैं। लेकिन जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। अगर आप भी पुराना सोना बेचने या बदलने जा रहे हैं, तो 5 गलतियां न करें।

बिना प्योरिटी टेस्ट के सोना बेच देना
कई लोग ज्वैलर के कहे पर ही भरोसा कर लेते हैं, लेकिन असली कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आपका सोना कितने कैरेट का है। एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि प्योरिटी की जांच जरूरी है। आजकल XRF टेस्ट (बिना तोड़े जांच) और जरूरत पड़े तो फायर असे टेस्ट से असली शुद्धता पता लगती है। बिना टेस्ट के बेचेंगे तो कम कैरेट बताकर रेट काटा जा सकता है। इसलिए सोना बेचने से पहले प्योरिटी टेस्ट की लिखित रिपोर्ट जरूर लें।
आज का गोल्ड रेट चेक न करना
सोने का रेट रोज बदलता है। अगर आपने उसी दिन का बाजार भाव नहीं देखा, तो ज्वेलर पुराने या कम रेट पर खरीद सकता है। रेट आमतौर पर इंडस्ट्री एसोसिएशन्स जैसे इंडियन बुलियन (India Bullion) और ज्वैलर्स एसोसिएशन (Jewellers Association) के आधार पर तय होते हैं। सोना बेचने से पहले उसी दिन का 24K और 22K रेट जरूर चेक करें।
मेल्टिंग लॉस और कटौती समझे बिना डील करना
जब पुराना गहना पिघलाया जाता है, तो उसमें से पत्थर, मिलावट और अन्य मेटल अलग किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में 'मेल्टिंग लॉस' या 'मेकिंग लॉस' के नाम पर कटौती होती है। यहीं सबसे ज्यादा खेल होता है। अगर आपने प्रतिशत नहीं पूछा, तो हजारों की कटौती हो सकती है। इसलिए डील से पहले पूछें कि कितने प्रतिशत कटेगा और इसे लिखित में लें।
BIS हॉलमार्क और HUID चेक न करना
अगर आप सोना एक्सचेंज कर रहे हैं और बदले में नया हॉलमार्क गहना ले रहे हैं, तो सिर्फ '916' देखकर संतुष्ट न हों। भारत में हॉलमार्किंग की जिम्मेदारी BIS (Bureau of Indian Standards) के पास है। असली हॉलमार्क में कुछ चीजें जरूरी होती हैं। इनमें BIS लोगो, कैरेट या फाइननेस (जैसे 916, 22K), 6 अंकों का HUID नंबर, ज्वैलर का आईडी मार्क और हॉलमार्किंग का साल शामिल हैं। HUID को BIS Care ऐप पर चेक किया जा सकता है। बिना HUID चेक किए ज्वैलरी कभी भी न खरीदें।
बिना बिल और ब्रेकअप के डील फाइनल करना
कई लोग सिर्फ बातचीत के आधार पर ही डील पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन ये गलती है। सही बिल में कुछ चीजें बिल्कुल साफ होनी चाहिए। जैसे पुरानी ज्वैलरी का वजन, प्योरिटी, कटौती प्रतिशत, आज का रेट और नई ज्वेलरी का मेकिंग चार्ज। एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि अनिवार्य हॉलमार्किंग के बाद अब 9K और 14K तक में सख्ती बढ़ी है, इसलिए ट्रांसपैरेंसी और भी जरूरी हो गई है।
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