29 अक्टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जारी रही। कच्चे तेल के बढ़ते दाम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों का असर बाजार पर दिख रहा है।
सोने और चांदी की कीमतों में 29 अक्टूबर को लगातार गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल के बढ़ते दामों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। फेड ने अपनी पिछली पॉलिसी मीटिंग में भले ही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया हो, लेकिन बाजार के जानकारों को दिसंबर 2026 में दरें बढ़ने की पूरी उम्मीद है। इसी वजह से सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 28 अक्टूबर को दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव करीब 0.3% गिरकर 1,43,705 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव भी 1.2% लुढ़ककर 1,94,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
देश के प्रमुख शहरों में सोने-चांदी के रेट
| शहर | 22 कैरेट (रु/10 ग्राम) | 24 कैरेट (रु/10 ग्राम) | चांदी (1 किलो) |
| नई दिल्ली | रु 1,31,533 | रु 1,43,490 | रु 1,94,300 |
| मुंबई | रु 1,31,762 | रु 1,43,740 | रु 1,94,640 |
| कोलकाता | रु 1,31,588 | रु 1,43,550 | रु 1,94,380 |
| चेन्नई | रु 1,32,147 | रु 1,44,160 | रु 1,95,200 |
| बेंगलुरु | रु 1,31,863 | रु 1,43,850 | रु 1,94,790 |
| हैदराबाद | रु 1,31,973 | रु 1,43,970 | रु 1,94,950 |
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी गुरुवार, 29 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट का रुख जारी रहा। COMEX पर सोना 0.01% फिसलकर 4,051 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, COMEX चांदी भी लगभग 00:55 GMT पर करीब 0.03% गिरकर 53.65 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
भारत में आज सोने-चांदी के ताज़ा भाव
घरेलू सर्राफा बाजार में हालिया गिरावट के बावजूद कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। 24 कैरेट सोने का भाव 29 अक्टूबर को सुबह करीब 6:20 बजे 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जबकि चांदी 1,94,990 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रही थी।
Bullion.co.in के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 22 कैरेट सोना 1,32,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, 925 स्टर्लिंग चांदी की कीमत 1,80,366 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
कीमती धातुओं पर ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों और ग्लोबल कमोडिटी मार्केट के उतार-चढ़ाव के कारण लगातार दबाव बना हुआ है। ऐसे में खरीदार और निवेशक आगे कीमतों में होने वाले बदलावों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।




