भारत में 'इंस्टेंट होम सर्विस' ऐप्स के यूज़र्स 1 करोड़ पार कर गए हैं। अर्बन कंपनी, प्रोन्टो और स्नैबिट जैसे प्लेटफॉर्म घर की सफाई व खाना बनाने जैसी तत्काल सेवाएं दे रहे हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है।

घर के छोटे-मोटे कामों के लिए अब मोबाइल ऐप्स पर निर्भर रहने वाले लोगों की संख्या देश में तेज़ी से बढ़ रही है. सिर्फ 10 मिनट में मदद पहुंचाने का दावा करने वाले 'इंस्टेंट होम सर्विस' ऐप्स इस्तेमाल करने वालों का आंकड़ा इसी साल मार्च में एक करोड़ को पार कर गया. यह जानकारी मॉर्गन स्टैनली की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अर्बन कंपनी, प्रोन्टो और स्नैबिट, इन तीन बड़े प्लेटफॉर्म्स पर कुल मिलाकर 1.04 करोड़ एक्टिव यूज़र्स हैं. लोग घर की सफाई, बर्तन धुलवाने, कपड़े धुलवाने और खाना बनवाने जैसे कामों के लिए इन ऐप्स का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

बाज़ार के बड़े खिलाड़ी

फिलहाल इस बाज़ार में अर्बन कंपनी सबसे आगे है, लेकिन नए खिलाड़ी भी तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं. आंकड़े कुछ इस तरह हैं:

  • अर्बन कंपनी: 65 लाख यूज़र्स
  • प्रोन्टो: 27 लाख यूज़र्स
  • स्नैबिट: 12 लाख यूज़र्स

अगर नए डाउनलोड्स की बात करें तो प्रोन्टो (43%) सबसे आगे है. इसके बाद अर्बन कंपनी (31%) और स्नैबिट (26%) का नंबर आता है.

बुकिंग में ज़बरदस्त उछाल

इन ऐप्स के ज़रिए काम बुक करने वालों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है.

  • अर्बन कंपनी के 'इंस्टा हेल्प' फीचर से हर महीने 10 लाख से ज़्यादा बुकिंग हो रही हैं.
  • प्रोन्टो रोज़ाना औसतन 18,000 बुकिंग हैंडल कर रहा है.
  • स्नैबिट भी हर महीने 10 लाख बुकिंग के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है.

कुल मिलाकर, ये तीनों कंपनियां मिलकर हर महीने 20 लाख से ज़्यादा काम पूरा कर रही हैं.

कंपनियों में लग रहा पैसा

बाज़ार में इस मौके को देखते हुए बड़े निवेशक भी इन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं. प्रोन्टो करीब 125-165 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बातचीत कर रहा है, जिससे कंपनी की वैल्यू 1,600 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो जाएगी. वहीं, स्नैबिट 500-580 करोड़ रुपये का निवेश हासिल करने की तैयारी में है, जिससे इसकी वैल्यू 3,300 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है.

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

भले ही यूज़र्स की संख्या बढ़ रही हो, लेकिन यह बिजनेस कितना मुनाफे वाला होगा, इस पर अभी भी सवालिया निशान है. यह सर्विस सेक्टर है, जो सामान डिलीवरी करने वाले क्विक कॉमर्स (जैसे ब्लिंकिट, ज़ेप्टो) से बिल्कुल अलग है. इन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर अच्छी तरह से ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध कराना है. स्टाफ को ढूंढने और उन्हें इंसेंटिव देने पर कंपनियां फिलहाल मोटा पैसा खर्च कर रही हैं. कई शहरों में घरेलू मदद मिलने में होने वाली परेशानी और एक तय रेट पर सर्विस मिलना ही इन ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण है.