Money Saving Tips: महीने के अंत में जेब खाली हो जाती है? अपनाएं फाइनेंस का वो गोल्डन रूल, जो बड़े इन्वेस्टर्स और अमीर लोग भी अपनाते हैं। जानें सैलरी स्मार्ट तरीके से मैनेज करने का तरीका।
How to Save Money: महीने की 1 तारीख को सैलरी आते ही लगता है कि इस बार खूब बचत करेंगे, लेकिन 20 तारीख आते-आते बैंक का बैलेंस तेजी से घटने लगता है और महीने के आखिर में जेब एकदम खाली हो जाती है। ज्यादातर लोगों की यही कहानी है। आप चाहे महीने का ₹20,000 कमाते हों या ₹1 लाख, अगर आपके पास पैसे मैनेज करने का सही तरीका नहीं है, तो पैसा कभी नहीं टिकेगा। दुनिया के बड़े इन्वेस्टर्स और फाइनेंस एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि जेब में हमेशा पैसा बनाए रखने के लिए किसी जादू या बहुत बड़ी सैलरी की जरूरत नहीं है। इसके लिए बस फाइनेंस की दुनिया का '1 गोल्डन रूल' अपनी लाइफ में उतारना होता है। आइए जानते हैं कि यह नियम क्या है और इसे आज से ही कैसे अप्लाई करें...
क्या है पैसे बचाने का वो 'गोल्डन रूल'?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, हम में से ज्यादातर लोग एक ही गलती करते हैं, सैलरी आते ही पहले सारे खर्च निपटाते हैं और सोचते हैं कि जो पैसा बचेगा, उसे बचा लेंगे। सच तो यह है कि खर्च करने के बाद कभी कुछ नहीं बचता है। पैसा कभी खत्म न हो, इसके लिए आपको अपना तरीका उल्टा करना होगा। इस नियम को 'पहले बचत, फिर खर्च' (Pay Yourself First) कहते हैं। मशहूर इन्वेस्टर वॉरेन बफे का भी यही मूल मंत्र है. 'खर्च करने के बाद जो बचे उसे मत बचाइए, बल्कि बचत करने के बाद जो बचे उसे खर्च करिए।'
इस नियम को लाइफ में कैसे लगाएं?
इस नियम को अपनी डेली लाइफ में लगाने के लिए फाइनेंस का सबसे हिट और सिंपल '50-30-20 रूल' अपना सकते हैं। अपनी महीने की जो भी कमाई है, उसे सैलरी आते ही 3 हिस्सों में बांट दें...
50% पैसा अपनी जरूरतों में लगाएं
अपनी कमाई का आधा हिस्सा उन चीजों के लिए रखिए, जिनके बिना आपका काम नहीं चल सकता है। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की स्कूल फीस और जरूरी दवाइयां आएंगी। नियम कहता है कि कोशिश करें कि आपके घर के बेसिक खर्च आपकी कुल कमाई के 50% हिस्से में ही निपट जाएं।
30% पैसे से अपने शौक पूरे करें
जिंदगी जीने के लिए थोड़ा एंजॉय करना भी जरूरी है। इसलिए कमाई का 30% हिस्सा अपनी पसंद और आराम पर खर्च करिए। इसमें बाहर होटल में खाना, फिल्म देखना, शॉपिंग करना, OTT का रिचार्ज या दोस्तों के साथ घूमने जैसी चीजें आएंगी। नियम कहता है कि अगर कभी महीने के आखिर में पैसे कम पड़ने लगें, तो सबसे पहले इसी 30% वाले हिस्से में कटौती करें।
20% पैसा अपनी सेविंग्स में लगाएं या इन्वेस्ट करें
यह आपकी कमाई का वो सबसे जरूरी हिस्सा है, जो आपको कभी गरीब नहीं होने देगा। सैलरी आते ही सबसे पहले इस 20% पैसे को अलग निकाल दीजिए। इसमें इमरजेंसी फंड, म्यूचुअल फंड की SIP, पीएफ (PF) या कोई भी सुरक्षित निवेश जैसे इन्वेस्टमेंट आएंगे। नियम कहता है कि इसे ऐसे मानिए जैसे यह पैसा आपके पास है ही नहीं। चाहे कुछ भी हो जाए, इस 20% पैसे को लगाना ही लगाना है।
इस नियम से पैसा कभी खत्म क्यों नहीं होगा?
इमरजेंसी में किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा
जब आप हर महीने 20% पैसा बचाते हैं, तो 1 साल के अंदर आपके पास एक बड़ा 'इमरजेंसी फंड' तैयार हो जाता है। घर में कोई मेडिकल इमरजेंसी हो या अचानक जॉब छूट जाए, यह फंड आपकी ढाल बन जाता है।
पैसे से पैसा बनना शुरू होगा
बैंक के सेविंग अकाउंट में पैसा रखने से वह बढ़ता नहीं है। जब आप अपने 20% पैसे को सही जगह जैसे SIP या अच्छे फंड्स में निवेश करते हैं, तो उस पर 'कंपाउंडिंग' (चक्रवृद्धि ब्याज) का जादू काम करता है। कुछ ही सालों में आपका यह छोटा-छोटा निवेश लाखों में बदल जाता है।
खर्चों पर अपने आप लगाम लग जाएगी
जब आप सैलरी आते ही बचत का पैसा अलग बैंक खाते में ट्रांसफर कर देते हैं, तो दिमाग अपने आप बचे हुए 80% पैसे में ही पूरे महीने का बजट मैनेज करना सीख जाता है।
शुरुआत करने के लिए आज ही करें ये 3 काम
दो अलग बैंक अकाउंट रखें
जिस खाते में सैलरी आती है, उसी से रोजमर्रा के खर्च न करें। एक दूसरा बैंक खाता सिर्फ 'बचत और निवेश' के लिए रखें और सैलरी आते ही 20% पैसा उसमें ट्रांसफर कर दें।
SIP की डेट सैलरी के अगले दिन रखें
अगर आपकी सैलरी 1 तारीख को आती है, तो अपने निवेश (जैसे SIP या आरडी) की तारीख 2 या 3 तारीख रखिए, ताकि पैसा खर्च होने से पहले ही सही जगह कट जाए।
कर्ज से दूर रहें
क्रेडिट कार्ड या उधार लेकर गैर-जरूरी शौक पूरे करने से बचें। जो चीज आज आपकी जेब गवाही नहीं दे रही, उसे ईएमआई (EMI) पर लेने की गलती न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई पर्सनल फाइनेंस, टैक्स और बचत से जुड़ी जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। नियम और दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं। इसलिए किसी भी वित्तीय योजना या स्कीम में कोई भी कदम उठाने या बदलाव करने से पहले संबंधित संस्थान के आधिकारिक नियमों को जांच लें या किसी एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।


