भारत की GenZ घूमने और महंगे गैजेट्स के लिए कर्ज़ ले रही है, वहीं चीन की GenZ भविष्य के लिए 'रिवेंज सेविंग' कर रही है। आसान लोन की वजह से भारत के युवा कर्ज़ के जाल में फंस सकते हैं, इसलिए एक्सपर्ट्स ने सावधान रहने की सलाह दी है।
नई दिल्ली: GenZ, Gen अल्फा, Gen बीटा…ये नाम सुनने में अच्छे लगते हैं। जैसे-जैसे साल बीतते हैं, इंसान की ज़िंदगी और उसकी पसंद भी वक्त के हिसाब से बदल जाती है। लेकिन एक फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर ने चेतावनी दी है कि बहुत ज़्यादा बदलाव हमारे जीवन स्तर को बिगाड़ भी सकता है। उन्होंने पैसे के मामले में भारत और चीन की GenZ के बीच का अंतर बताया है और कहा है कि अगर भारत की GenZ नहीं चेती, तो खतरा पक्का है।
भारत की GenZ की सबसे बड़ी समस्या यही है। भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि पर्सनल लोन मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या सोना-चांदी जैसी संपत्ति खरीदने के लिए नहीं लिया जा रहा है। 2025 की पहली छमाही में 27% पर्सनल लोन सिर्फ घूमने-फिरने के लिए लिए गए। जी हाँ, दूर-दराज की यात्रा करने के लिए ही 2025 के पहले छह महीनों में 27% पर्सनल लोन लिए गए हैं। बिना किसी गारंटी के मिलने वाले पर्सनल लोन का इस्तेमाल भारत की GenZ घूमने-फिरने के लिए कर रही है। यही नहीं, देश में बिकने वाले 70% आईफोन EMI पर खरीदे जा रहे हैं।
महंगे कॉन्सर्ट में जाने के लिए 20 हजार से भी ज़्यादा कीमत के फ्लाइट टिकट कर्ज़ लेकर खरीदे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ अनुमानों के मुताबिक, 2024 में 39% GenZ लोगों ने घर का किराया, रोज़ का राशन और घर का सामान भी कर्ज़ पर ही खरीदा है।
इसके दो कारण हैं। पहला, पुरानी पीढ़ी घर जैसी असली संपत्ति खरीदने के लिए सालों तक बचत करती थी। लेकिन आज, घरों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि GenZ यह सोचकर ही प्लान छोड़ देती है कि वे 20 साल तक 2 लाख की EMI कैसे भरेंगे। इसके बजाय, वे पल भर की खुशी देने वाली चीज़ों पर अंधाधुंध पैसा खर्च कर रहे हैं।
दूसरा कारण है भारत में फिनटेक कंपनियों की तरक्की। ज़ीरो-कॉस्ट EMI और 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) की वजह से कर्ज़ लेना और भी आसान हो गया है। आजकल देश में 50 हज़ार तक के लोन के लिए किसी गारंटी की ज़रूरत नहीं होती। ऐसे लोन कुछ ही मिनटों में अप्रूव भी हो जाते हैं।
चीन में ऐसे हालात नहीं हैं
अगर भारत की GenZ का यह हाल है, तो उतनी ही आबादी वाले चीन की GenZ की सोच बिल्कुल अलग है। उनकी सोच जानकर आपको ज़रूर हैरानी होगी। चीन की पीढ़ी ने यह दौर 2015 से 2019 के बीच देखा था। तब वे स्टेटस बनाए रखने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा कर्ज़ लेने लगे थे। लेकिन अब, उनकी GenZ 'रिवेंज स्पेंडिंग' के बजाय 'रिवेंज सेविंग' पर उतर आई है। जी हाँ, चीन की GenZ 'गोल्ड बीन्स' में निवेश कर रही है। उन्हें समझ आ गया है कि भविष्य में सोना ही उनकी असली पूंजी होगी।
भारत की GenZ यह सोचकर आज कर्ज़ ले रही है कि 'कल तो कमा ही लेंगे', जबकि चीन की GenZ यह सोचकर आज बचत कर रही है कि 'शायद भविष्य में नौकरी न रहे'।
