भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) को बड़े साइबर फ्रॉड मामले की जांच के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उसे बेस्ट एगमोंट केस अवार्ड 2026 में रनर-अप घोषित किया गया, जो वित्तीय अपराधों के खिलाफ भारत की मजबूत होती स्थिति को दर्शाता है।
नई दिल्ली [भारत], 11 जुलाई (एएनआई): भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) को वित्तीय अपराधों से निपटने के प्रयासों के लिए अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है। एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले की जांच के लिए इसे 'बेस्ट एगमोंट केस अवार्ड' (BECA) 2026 में रनर-अप चुना गया है। यह पुरस्कार धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ वित्तीय खुफिया जानकारी और सीमा पार सहयोग को मजबूत करने पर देश के फोकस को और पुख्ता करता है। यह पुरस्कार अज़रबैजान के बाकू में आयोजित एगमोंट ग्रुप प्लेनरी के दौरान प्रदान किया गया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, FIU-IND के मामले को रनर-अप घोषित किए जाने से पहले एगमोंट ग्रुप के 182 सदस्य देशों की प्रस्तुतियों में से केवल दो फाइनलिस्टों में से एक के रूप में चुना गया था। मंत्रालय ने कहा कि यह मान्यता वित्तीय खुफिया जानकारी के क्षेत्र में भारत के बढ़ते नेतृत्व को उजागर करती है और उन्नत परिचालन विश्लेषण, मजबूत घरेलू समन्वय और प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय खुफिया साझाकरण के माध्यम से देश के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म (AML/CFT) ढांचे को मजबूत करने के लिए FIU-IND की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
868 करोड़ रुपये का था मामला
यह मामला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा एक बड़े पैमाने पर हुई साइबर धोखाधड़ी के संबंध में साझा की गई खुफिया जानकारी से शुरू हुआ। मंत्रालय के अनुसार, FIU-IND के वित्तीय खुफिया विश्लेषण ने एक जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसमें लगभग 868 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की आय, 5,000 से अधिक म्यूल बैंक खाते और कई देशों में फैले जटिल क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन शामिल थे।
मंत्रालय ने कहा कि इस जांच ने एगमोंट सिक्योर वेब (ESW) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को प्रदर्शित किया। FIU-IND ने सीमा पार क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का पता लगाने और वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग के रास्ते की पहचान करने के लिए कई देशों में समकक्ष वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ वित्तीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान किया।
ED ने की बड़ी कार्रवाई
मंत्रालय ने बताया कि FIU-IND की ऑपरेशनल एनालिसिस रिपोर्ट के आधार पर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की। इस दौरान 13 स्थानों पर तलाशी ली गई, 47 लाख रुपये नकद और लगभग 13.6 करोड़ रुपये की क्रिप्टोकरेंसी (USDT) जब्त की गई। साथ ही, 8.67 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दो अभियोजन शिकायतें (Prosecution Complaints) दायर की गईं।
मंत्रालय के अनुसार, यह अंतर्राष्ट्रीय मान्यता तेजी से जटिल होते जा रहे वित्तीय अपराधों से निपटने में वित्तीय खुफिया जानकारी और समन्वित प्रवर्तन की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। साथ ही, यह वैश्विक भागीदारों के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से सीमा पार मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने की भारत की क्षमता को भी मजबूत करती है।
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