Lohia Corp IPO GMP: ₹1,102 करोड़ के IPO में कितना रिस्क और कितना रिवॉर्ड? जानिए लेटेस्ट GMP, प्राइस बैंड, लॉट साइज, कंपनी का बिजनेस, ताकत, कमजोरियां और जरूरी बातें।

Lohia Corp IPO Review: प्लास्टिक पैकेजिंग वाली कंपनी लोहिया कॉर्प लिमिटेड (Lohia Corp Ltd) अपना ₹1,102.08 करोड़ का आईपीओ लेकर प्राइमरी मार्केट में उतर चुकी है। भारत में 40% से अधिक मार्केट शेयर और 100 से ज्यादा देशों में मजबूत पकड़ रखने वाली यह कंपनी निवेशकों के लिए अट्रैक्टिव मौका दिख रही है। लेकिन क्या 100% OFS (ऑफर फॉर सेल) वाले इस आईपीओ में दांव लगाना सही रहेगा? आइए जानते हैं लोहिया कॉर्प के बिजनेस मॉडल, ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP), बड़े रिस्क और संभावित रिवॉर्ड...

Lohia Corp IPO की पूरी डिटेल

IPO खुलने की तारीख: 23 जुलाई 2026

IPO बंद होने की तारीख: 27 जुलाई 2026

प्राइस बैंड: ₹404 से ₹425 प्रति शेयर

लॉट साइज: 35 शेयर

कम से कम निवेश: ₹14,875

इश्यू साइज: ₹1,102.08 करोड़

फ्रेश इश्यू: नहीं

ऑफर फॉर सेल (OFS): 100%

Lohia Corp क्या करती है?

जब भी आप सीमेंट की बोरी, खाद का बैग, अनाज की प्लास्टिक बोरी या इंडस्ट्रियल पैकेजिंग देखते हैं, तो उन्हें बनाने के लिए जिन मशीनों की जरूरत होती है, उन्हें बनाने का काम Lohia Corp करती है। कंपनी खुद बोरी नहीं बनाती, बल्कि ऐसी पूरी मशीन लाइन तैयार करती है, जिससे दूसरी कंपनियां प्लास्टिक की मजबूत बुनी हुई बोरियां बना सकें।

Lohia Corp का कारोबार 100 देशों में फैला है

लोहिया कॉर्प सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। करीब 42% कमाई विदेशों से आती है। कंपनी के ग्राहक करीब 100 देशों में हैं। अब तक 2,000 से ज्यादा ग्राहकों को मशीनें सप्लाई कर चुकी है। यानी कंपनी का बिजनेस सिर्फ भारतीय बाजार पर निर्भर नहीं है।

Lohia Corp IPO GMP: ग्रे मार्केट का इशारा क्या है?

प्राइमरी मार्केट में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) अनऑफिशियल सेंटीमेंट बताने का काम करता है। अनऑफिशियल मार्केट में लोहिया कॉर्प के शेयरों को लेकर अच्छी सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। हालांकि, केवल जीएमपी को देखकर लिस्टिंग गेन की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं है। मार्केट एक्सपर्ट्स की मानें तो कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट, कर्ज में आई कमी और रीजनेबल वैल्यूएशन की वजह से लिस्टिंग वाले दिन निवेशकों को पॉजिटिव लिस्टिंग गेन का रिवॉर्ड मिल सकता है।

GMP क्या है और कितना सही?

जीएमपी यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम (Grey Market Premium) यह बताता है कि अनऑफिशियल मार्केट में IPO को लेकर कैसी मांग दिख रही है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि GMP सिर्फ एक संकेत होता है, गारंटी नहीं। GMP हर घंटे बदल सकता है। सिर्फ GMP देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी के बिजनेस, फाइनेंशियल्स, वैल्यूएशन और रिस्क को भी जरूर देखने चाहिए।

Lohia Corp IPO के 3 बड़े रिवॉर्ड

  1. भारत के वोवन राफिया मशीनरी सेगमेंट में 40% से ज्यादा हिस्सेदारी है। प्रतियोगी कंपनियों के लिए इस स्केल को पाना बेहद कठिन है।
  2. पिछले 2 सालों में कंपनी ने अपना कर्ज काफी घटाया है। इसका Net Debt-to-EBITDA रेशियो केवल 0.36x है, यानी कंपनी अपनी कमाई से 6 महीने में पूरा कर्ज चुका सकती है।
  3. ₹425 के अपर प्राइस बैंड पर इसका P/E रेशियो 23.21x है, जो इसके लिस्टेड प्रतिद्वंदियों जैसे LMW या Jyoti CNC के मुकाबले काफी किफायती और बैलेंस है।

Lohia Corp IPO: 3 बड़े रिस्क

  1. कंपनी का 90% से ज्यादा रेवेन्यू वोवन राफिया मशीनरी से ही आता है। अगर प्लास्टिक पैकेजिंग की मांग घटी, तो सीधे कारोबार पर असर पड़ेगा।
  2. दुनियाभर में सिंगल-यूज प्लास्टिक और पेट्रोलियम बेस्ड पॉलिमर पर कड़े नियम बन रहे हैं। अगर सरकारें जूट या अन्य विकल्पों को बढ़ावा देती हैं, तो लॉन्ग-टर्म मांग धीमी हो सकती है।
  3. 42% कमाई एक्सपोर्ट से होने के कारण विदेशी मुद्रा (डॉलर) में होने वाले उतार-चढ़ाव और जिओ-पॉलिटिकल तनाव का असर कंपनी के मार्जिन पर पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे निवेश की सलाह न मानें। शेयर बाजार और IPO में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।