Why did Mehul Mohan leave India: क्या 27 साल के भारतीय स्टार्टअप फाउंडर मेहुल मोहन ने सच में भारत छोड़ दिया? आखिर कंपनी बेचने के बाद उन्होंने दुबई को ही नया ठिकाना क्यों चुना? क्या वह भारत के सिस्टम से निराश थे? जानिए बेंगलुरु से दुबई शिफ्ट होने के पीछे की पूरी कहानी।
Entrepreneur leaves India for Dubai: भारत के तेजी से उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। महज 27 साल की उम्र में अपनी टेक कंपनी बेचने वाले युवा उद्यमी मेहुल मोहन ने भारत छोड़कर दुबई में बसने का फैसला किया है। खास बात यह है कि उन्होंने साफ कर दिया है कि यह फैसला पैसे या टैक्स बचाने के लिए नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे कुछ ऐसे कारण हैं जिन पर वह सार्वजनिक रूप से ज्यादा बात नहीं करना चाहते। मेहुल के इस फैसले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक सफल भारतीय स्टार्टअप फाउंडर ने बेंगलुरु छोड़कर दुबई को अपना नया घर बनाने का फैसला कर लिया?

X पर किया ऐलान, लेकिन वजह बताने से किया इनकार
मेहुल मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि वह हाल ही में बेंगलुरु और भारत छोड़कर दुबई शिफ्ट हो गए हैं और फिलहाल अनिश्चित समय तक वहीं रहने की योजना है। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले के पीछे की पूरी वजह शेयर कर सकते हैं, लेकिन इंटरनेट पर लोग अक्सर बातों का गलत मतलब निकाल लेते हैं, इसलिए उन्होंने ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं बताया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर संकेत दिया कि भारत की मौजूदा व्यवस्था और सिस्टम से वह काफी हद तक निराश और थक चुके थे।
‘यह आर्थिक फैसला नहीं था’
दुबई को अक्सर टैक्स-फ्री इनकम, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित माहौल के लिए जाना जाता है। ऐसे में कई लोगों ने माना कि शायद मेहुल का फैसला भी आर्थिक फायदे से जुड़ा होगा। लेकिन मेहुल ने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास कोई बड़ी क्रिप्टो संपत्ति या विशाल फंड नहीं है और उनका यह कदम पूरी तरह वित्तीय कारणों से प्रेरित नहीं था। उन्होंने कहा कि वह भारत के सिस्टम से काफी हद तक ‘बर्न आउट’ महसूस कर रहे थे और यही कारणों में से एक है जिसने उन्हें देश छोड़ने के फैसले तक पहुंचाया।
अमेरिका भी था विकल्प, लेकिन चुना दुबई
मेहुल ने खुलासा किया कि उन्होंने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को को भी संभावित विकल्प के रूप में देखा था। टेक इंडस्ट्री में करियर आगे बढ़ाने के लिए सिलिकॉन वैली आज भी दुनिया के सबसे बड़े केंद्रों में गिनी जाती है। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिका जाने का विचार छोड़ दिया और आखिरकार दुबई को अपनी नई मंजिल बनाया। उनका कहना है कि वह उम्मीद करते हैं कि यूएई भविष्य में उनका स्थायी घर बनेगा।
स्टार्टअप बेचने के बाद नई शुरुआत
मेहुल मोहन हाल ही में अपनी स्टार्टअप कंपनी Fermion से पूरी तरह बाहर निकल चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का अधिग्रहण चेन्नई की सॉफ्टवेयर कंपनी Testpress ने किया है। हालांकि डील की वित्तीय शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। एक यूट्यूब वीडियो में मेहुल ने कहा कि कंपनी से एग्जिट के बाद वह कुछ समय का ब्रेक लेना चाहते हैं ताकि यह तय कर सकें कि आगे किस दिशा में काम करना है। उनके मुताबिक यह एक क्लीन एग्जिट है और अब वह नए अवसरों पर विचार करेंगे।
अब गोल्डन वीजा की तैयारी
मेहुल फिलहाल दुबई में रेजिडेंट वीजा पर रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में वह यूएई का गोल्डन वीजा हासिल करने की कोशिश करेंगे। गोल्डन वीजा यूएई की एक विशेष व्यवस्था है, जिसके तहत योग्य लोगों को लंबी अवधि तक देश में रहने और काम करने की अनुमति मिलती है।
क्या परिवार भी जाएगा दुबई?
सोशल मीडिया पर जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपने माता-पिता को भी दुबई ले जाने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने बताया कि उनकी मां अभी नौकरी कर रही हैं और वह नौकरी बीच में छोड़ना नहीं चाहतीं। लेकिन भविष्य में परिवार को दुबई लाने की उनकी योजना है।
क्यों चर्चा में है यह फैसला?
भारत से दुबई जाने वाले पेशेवरों और उद्यमियों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। बेहतर जीवनशैली, बिजनेस-फ्रेंडली माहौल, वैश्विक कनेक्टिविटी और आसान कारोबारी प्रक्रियाओं के कारण दुबई भारतीय उद्यमियों की पसंदीदा जगहों में शामिल हो चुका है। ऐसे समय में एक युवा भारतीय स्टार्टअप फाउंडर का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि वह भारत के सिस्टम से थक चुके हैं, इस फैसले को और ज्यादा चर्चा का विषय बना रहा है। यही वजह है कि मेहुल मोहन का यह कदम सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी बहस का नया मुद्दा बन गया है।

