वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने (Nirmala Sitharaman) ने 1 फरवरी को अपना 5वां बजट पेश किया। 2023-24 का यह बजट 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। ऐसे में मिडिल क्लास को टैक्स छूट का तोहफा दिया गया।

Income Tax: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने (Nirmala Sitharaman) ने 1 फरवरी को अपना 5वां बजट पेश किया। 2023-24 का यह बजट 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है। ऐसे में मिडिल क्लास को टैक्स छूट का तोहफा दिया गया। वित्त मंत्री ने बजट में इनकम टैक्स छूट का दायरा 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपए कर दिया। इसके साथ ही अब 7 लाख तक की आमदनी पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि, ये छूट नई टैक्स रिजीम के तहत मिलेगी। अभी भी इनकम टैक्स रिटर्न भरने के 2 ऑप्शन मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही इनकम टैक्स के स्लैब भी 6 से घटाकर अब 5 कर दिए गए हैं।

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इनकम टैक्स में मिली राहत :

  • नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में रिबेट की लिमिट 5 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपए कर दी गई है।
  • नई कर व्यवस्था के तहत अब बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट 3 लाख रुपए कर दी गई है।
  • 7 लाख तक की आय वाले लोगों को अब कोई टैक्स नहीं देना होगा।
  • मिडिल क्लास के लिए अब टैक्स की नई दरें।
  • आखिरी बार 2014-15 बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया था।
  • न्यू टैक्स रिजीम में 15.5 लाख तक की इनकम पर स्टैंडर्ड डिडक्शन 52500 रुपए कर दिया गया है। 

अब ऐसा होगा नया टैक्स स्लैब : 

इनकमटैक्स (प्रतिशत में)
0 से तीन लाख0%
3 से 6 लाख5%
6 से 9 लाख10%
9 से 12 लाख15%
12 से 15 लाख20%
15 लाख से ज्यादा30%

नए टैक्स रिजीम वालों को ही मिलेगी राहत :

इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने के 2 ऑप्शन मिलते हैं। 1 अप्रैल, 2020 को नया ऑप्शन दिया गया था। सरकार ने अब नए टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट ऑप्शन कर दिया है। यानी बजट में इनकम टैक्स से दी गई राहत सिर्फ इसी पर लागू होगी। अगर कोई शख्स पुराना टैक्स रिजीम चुनता है तो उसे ये राहत नहीं मिलेगी।

पहले ये थी इनकम टैक्स की व्यवस्था :

इससे पहले 2020-21 के लिए केंद्रीय बजट पेश करते समय, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई रियायती इनकम टैक्स व्यवस्था का ऐलान किया था। जिसमें टैक्स की कम दरें पेश की गई थीं। नई व्यवस्था के तहत, 0 से 2.50 लाख रुपए तक की आमदनी पर पूरी तरह से आयकर छूट थी। 

- 2.5 से 5 लाख रुपये तक की इनकम पर 5 फीसदी टैक्स का प्रावधान था। 

- 5 से 7.50 लाख रुपए तक की आमदनी वालों को 10 प्रतिशत टैक्स देना होता था।

- जिनकी इनकम 7.50 लाख से 10 लाख रुपए के बीच है, उन्हें 15 प्रतिशत टैक्स होना होता था।

- वहीं, 10 से 12.50 लाख रुपए तक की इनकम वालों को 20 प्रतिशत टैक्स देना होता था।

- 12.50 लाख से 15 लाख रुपए की इनकम वालों को 25 प्रतिशत टैक्स देना होता था।

- जिनकी इनकम 15 लाख रुपए से ज्यादा है, ऐसे लोगों को 30 प्रतिशत टैक्स देना होता था।