संभलकर करें क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में कंवर्ट, 5 बातों का रखें ध्यान
बिजनेस डेस्क : क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। हर बैंक क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने EMI का ऑफ्शन दे रहे हैं। ऐसे में लोग खरीदारी कर किस्तों में बिल का भुगतान कर रहे हैं। ये कर्ज के जाल में फंसा सकता है। इसलिए 5 बातों का ध्यान रखें…

कब EMI में कन्वर्ट करें क्रेडिट कार्ड बिल
एक्सरपर्ट्स बताते हैं कि क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में कन्वर्ट करने से पहले कैलकुलेट करें कि आप कितना पैसा चुका सकते हैं, कितना बिल ईएमआई में कन्वर्ट करना चाहिए ताकि ज्यादा ब्याज देने से बच जाएं। क्योंकि ईएमआई में कन्वर्ट होने वाले बिल पर तगड़ा ब्याज लगता है। अगर आप क्रेडिट कार्ड से बड़े ट्रांजेक्शन की प्लानिंग कर रेह हैं तो पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के बदले लोन जैसे ऑप्शन की तुलना करें। कई बार इनकी ब्याज दर क्रेडिट कार्ड की EMI की ब्याज दर से कम होती है।
क्या क्रेडिट कार्ड से बैलेंस ट्रांसफर का ऑप्शन चुनना चाहिए
अगर क्रेडिट कार्ड पर EMI में कन्वर्ट करने की सुविधा नहीं है या ब्याज दर बहुत ही ज्यादा है तो क्रेडिट कार्ड बैलेंस ट्रांसफर का ऑफ्शन भी चुन सकते हैं। इसके तहत अपने क्रेडिट कार्ड बिल को किसी दूसरे बैंक के क्रेडिट कार्ड में ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके बाद आसानी से EMI दे सकते हैं।
ब्याज दर की तुलना कब करें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड के बकाये को EMI में कन्वर्ट करने पर 18 से 49% तक सालाना की दर से ब्याज चुकाना पड़ता है। हालांकि, EMI में बदलने के बाद कितनी ब्याज दर लगेगी ये कार्ड होल्डर की क्रेडिट प्रोफाइल, उसके भुगतान रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन पैटर्न पर निर्भर करता है। इसलिए, अगर आप एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं तो सभी क्रेडिट कार्ड्स के ब्याज दरों की तुलना करने के बाद सबसे बेस्ट विकल्प चुनें।
क्रेडिट कार्ड EMI के भुगतान का समय कितना रखना चाहिए
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रेडिट कार्ड EMI कंवर्जन की भुगतान की अवधि बैंक और चुनी गई EMI फैसिलिटी के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर 3 से 48 महीनों तक के लिए होती है। जितनी लंबी अवधि चुनेंगे, उतना ही ज्यादा ब्याज भी चुकाना पड़ेगा। इसलिए EMI चुकाने के लिए हमेशा सबसे छोटी अवधि का विकल्प चुनना चाहिए।
EMI कंवर्जन से और क्या करना चाहिए
क्रेडिट कार्ड से बड़ी खरीदारी कर EMI में भुगतान की सोच रहे हैं तो नो-कॉस्ट EMI जैसी फैसिलिटीज के बारें में पता करें। नो-कॉस्ट ईएमआई में ब्याज पर मर्चेंट छूट देता है। जिससे खरीदारी के बाद कार्ड होल्डर को EMI के तौर पर सिर्फ मूल राशि ही देनी पड़ती है। हालांकि, ब्याज पर GST चुकाना होता है।
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