सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ, गोल्ड लोन एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। जानिए कैसे बढ़ती कीमतें लोन लेने वालों को प्रभावित करती हैं और क्या यह सही समय है गोल्ड लोन लेने का।

आज के समय में सोने का व्यापार अपने सबसे उच्च स्तर पर है। आज के समय में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ, गोल्ड लोन अचानक आने वाली आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का एक लोकप्रिय तरीका बन गया है। आइए जानते हैं कि कीमतें बढ़ने से गोल्ड लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ता है. 

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सोने की कीमतों का गोल्ड लोन पर सीधा असर पड़ता है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी गोल्ड लोन के लिए अनुकूल मानी जाती है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी होने से गोल्ड लोन लेने वालों को ज्यादा लोन मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे घरेलू बाजार में भी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। सोने की कीमतों में गिरावट आने पर भी, बैंक और वित्तीय संस्थान यह सुनिश्चित करते हैं कि लोन चुकाने में कोई दिक्कत न हो और लोन डूबने न पाए।

मौजूदा ऊंची सोने की कीमतों के साथ, लोन-टू-वैल्यू अनुपात उधारकर्ताओं के लिए ज़्यादा फायदेमंद है। उदाहरण के लिए, RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारत के प्रमुख बैंक और वित्तीय संस्थान 75% तक गोल्ड लोन दे सकते हैं। जैसे-जैसे बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है, सोने को गिरवी रखकर ज़्यादा लोन लिया जा सकता है, और यही कारण है कि गोल्ड लोन तत्काल वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का एक आकर्षक तरीका बन गया है।

भारत में कुल गोल्ड लोन बाजार 18 लाख करोड़ रुपये का है। 2023 से 2028 तक इस क्षेत्र में 6.80% की वृद्धि होने की उमीद है। भारतीय घरों में लगभग 27,000 टन से ज़्यादा सोना है। इसमें से लगभग 5,300 टन सोना लोन लेने के लिए गिरवी रखा गया है।