पश्चिमी एशिया में युद्ध से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल 4-5 रुपये/लीटर और LPG सिलेंडर 40-50 रुपये तक महंगा हो सकता है। सरकार अगले 5-7 दिनों में कीमतों पर फैसला ले सकती है।

नई दिल्ली: आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसका असर अब भारत पर भी पड़ने वाला है। इंडिया टुडे ने टॉप सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सरकार देश में पेट्रोल, डीजल और LPG सिलेंडर के दाम बढ़ाने पर गंभीरता से सोच रही है।

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सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 4 से 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, घरेलू गैस सिलेंडर भी 40 से 50 रुपये तक महंगा हो सकता है। अगर सरकार इस फैसले को मंजूरी देती है, तो यह करीब चार साल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहली बड़ी बढ़ोतरी होगी। आपको बता दें कि 2022 से तेल की खुदरा कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

इस संभावित बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण तेल सप्लाई में रुकावट आने का डर है। इसके अलावा, समुद्री जहाजों से ढुलाई का खतरा और लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की आशंका ने कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं। इससे तेल बेचने वाली कंपनियों (OMCs) की लागत बढ़ गई है।

गाड़ियों में डाले जाने वाले पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बदलने से तेल कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है। साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सरकार पर भी वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। इससे सरकार की सब्सिडी या टैक्स कटौती के जरिए ग्राहकों को राहत देने की क्षमता भी कम हो रही है।

अगले 5-7 दिनों में फैसला संभव

सूत्रों ने बताया कि सरकार पश्चिमी एशिया के हालात और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर इसके असर पर करीब से नजर रख रही है। हालांकि अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन उम्मीद है कि अगले 5 से 7 दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी पर कोई आधिकारिक ऐलान हो सकता है।

फिलहाल, सरकार के अंदर इस पर चर्चा चल रही है कि दाम कब और कितने बढ़ाए जाएं। सरकार एक तरफ तेल कंपनियों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम करना चाहती है, तो दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बढ़ोतरी का महंगाई पर बहुत ज्यादा असर न पड़े।