RBI ने डिपॉजिट इंश्योरेंस के लिए नया रिस्क-बेस्ड प्रीमियम सिस्टम पेश किया है। अब बैंकों को उनके जोखिम प्रोफाइल के आधार पर प्रीमियम देना होगा। इससे कम जोखिम वाले बैंकों का मुनाफा बढ़ेगा और बैंकिंग सेक्टर में बेहतर रिस्क मैनेजमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने डिपॉजिट इंश्योरेंस के लिए एक नया रिस्क-बेस्ड प्रीमियम सिस्टम पेश किया है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए सिस्टम से अच्छा काम करने वाले बैंकों का मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, यह कदम पूरे बैंकिंग सेक्टर को रिस्क मैनेजमेंट के बेहतर तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

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यह नया फ्रेमवर्क 6 फरवरी, 2026 को जारी किया गया था। यह मौजूदा सिस्टम की जगह लेगा, जिसमें सभी बैंक हर 100 रुपये के डिपॉजिट पर 12 पैसे का एक जैसा प्रीमियम चुकाते हैं। नए सिस्टम में, हर बैंक के रिस्क प्रोफाइल का आकलन करके प्रीमियम तय किया जाएगा। यह रेटिंग डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) करेगा। इसका मतलब है कि जो बैंक बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं और जिनका रिस्क कम है, उन्हें कम प्रीमियम देना होगा। वहीं, कमजोर बैंकों को ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ेगा।

ICRA का अनुमान है कि जिन बैंकों का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है और जिन्होंने पहले कोई क्लेम नहीं किया है, उनकी संपत्ति पर मिलने वाला रिटर्न (return on assets) करीब 4 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है। देश के कुल डिपॉजिट का लगभग 80% हिस्सा रखने वाले बैंकों को इस कम प्रीमियम का फायदा मिलेगा। इससे पूरे बैंकिंग सेक्टर में औसतन 3 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, जो बैंक लंबे समय से बिना किसी बड़ी दिक्कत के डिपॉजिट इंश्योरेंस फंड में योगदान दे रहे हैं, उन्हें 'विंटेज इंसेंटिव' के नाम पर एक खास छूट भी मिलेगी।

ICRA ने यह भी बताया है कि अगर भविष्य में डिपॉजिट इंश्योरेंस की लिमिट बढ़ाई जाती है, तो बैंकों का प्रीमियम खर्च बढ़ सकता है और इसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि, नए सिस्टम के तहत अच्छे बैंकों को मिलने वाली छूट इस अतिरिक्त बोझ को कुछ हद तक कम करने में मदद करेगी। फिलहाल, एक बैंक में हर जमाकर्ता को 5 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह नया प्रीमियम स्ट्रक्चर भविष्य में इस लिमिट को बढ़ाने का रास्ता भी बना सकता है।