RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए एक नया डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका मकसद डेटा जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना है। इस ड्राफ्ट में बोर्ड-स्तरीय निगरानी और डेटा क्वालिटी सुनिश्चित करने जैसे कई अहम नियम शामिल हैं।
नई दिल्ली, [भारत] 16 जुलाई (ANI): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक व्यापक डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है, जिसमें बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और अन्य विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities) को अपने समग्र जोखिम प्रबंधन प्रणालियों के हिस्से के रूप में डेटा जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता होगी।
इसमें कहा गया है, "विनियमित संस्थाओं (REs) के लिए डेटा तेजी से एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक संपत्ति के रूप में उभरा है, जो व्यावसायिक संचालन, ग्राहक सेवा, वित्तीय रिपोर्टिंग, नियामक अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और रणनीतिक निर्णय लेने का आधार है।" RBI के ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुसार, प्रस्तावित फ्रेमवर्क डेटा गवर्नेंस पर नियामक अपेक्षाओं को निर्धारित करता है, जिसमें गवर्नेंस स्ट्रक्चर, भूमिकाएं और जिम्मेदारियां, डेटा आर्किटेक्चर, मेटाडेटा और लिनेज, डेटा क्वालिटी, और थर्ड-पार्टी डेटा-शेयरिंग व्यवस्था शामिल है। केंद्रीय बैंक ने 17 अगस्त तक इस ड्राफ्ट पर जनता से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
किन पर लागू होगा यह फ्रेमवर्क?
यह ड्राफ्ट फ्रेमवर्क कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, NBFCs, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों, एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) और क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों पर लागू होगा।
क्यों पड़ी इस फ्रेमवर्क की जरूरत?
RBI ने कहा कि डेटा की बढ़ती मात्रा, विविधता और गति के साथ, यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत गवर्नेंस महत्वपूर्ण हो गया है कि डेटा व्यावसायिक कार्यों और प्रणालियों में सटीक, सुसंगत, सुरक्षित और उद्देश्य के लिए उपयुक्त बना रहे। केंद्रीय बैंक ने उल्लेख किया कि डेटा गवर्नेंस और इसके प्रबंधन में कमजोरियां विनियमित संस्थाओं को वित्तीय, परिचालन, अनुपालन और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिमों में डाल सकती हैं।
प्रस्ताव के तहत, विनियमित संस्थाओं को पूरे डेटा लाइफसाइकिल को कवर करने वाला एक डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क स्थापित करना होगा। RBI के ड्राफ्ट प्रस्ताव में कहा गया है, "एक RE को सभी डेटा पर लागू होने वाला एक डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क (DGF) स्थापित करना चाहिए और इसे अपने जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क के साथ संरेखित करना चाहिए।"
बोर्ड स्तर पर होगी निगरानी
RBI ने यह भी प्रस्तावित किया है कि बोर्ड इस फ्रेमवर्क की निगरानी करे, जिसमें प्रत्येक विनियमित संस्था या तो एक समर्पित बोर्ड-स्तरीय डेटा गवर्नेंस समिति का गठन करे या किसी मौजूदा बोर्ड समिति को यह जिम्मेदारी सौंपे।
RBI के ड्राफ्ट प्रस्ताव में कहा गया है, "एक RE को एक बोर्ड-स्तरीय डेटा गवर्नेंस कमेटी (DGC) स्थापित करनी चाहिए या किसी मौजूदा बोर्ड कमेटी को इसकी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।" यह नामित समिति डेटा गवर्नेंस नीतियों को मंजूरी देने, कार्यान्वयन की देखरेख करने, महत्वपूर्ण उल्लंघनों की समीक्षा करने और प्रमुख मुद्दों को बोर्ड को रिपोर्ट करने के लिए जिम्मेदार होगी।
'सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ' का प्रस्ताव
RBI ने आगे यह भी प्रस्ताव दिया है कि प्रत्येक विनियमित संस्था हर डेटा एलिमेंट के लिए एक "सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ" बनाए रखे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि डाउनस्ट्रीम सिस्टम, मॉडल और व्यावसायिक प्रक्रियाएं एक ही आधिकारिक स्रोत पर निर्भर हैं। (ANI)
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