भारत के अमीर निवेशक अब म्यूचुअल फंड की जगह AIF में निवेश कर रहे हैं। ये फंड्स ज़्यादा रिटर्न के लिए छोटे-मझोले उद्यमों (SME) में बड़ा निवेश करते हैं, जहाँ म्यूचुअल फंड के नियम उन्हें रोकते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत के बड़े-बड़े अमीर अपना पैसा कहां लगाते हैं? पिछले दो सालों में, देश के अरबपतियों (जिन परिवारों की संपत्ति 10 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा है) के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक ज़माना था जब उन्हें म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट बहुत पसंद थे, लेकिन अब वैसी बात नहीं रही। इसके बजाय, वे अपनी करोड़ों की दौलत 'AIF' यानी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स में लगा रहे हैं। और उसमें भी, सबसे ज़्यादा डिमांड उन फंड्स की है जो छोटे और मझोले कारोबारों पर फोकस करते हैं।

म्यूचुअल फंड पर लगा है एक 'स्पीड-ब्रेकर'
भारत में लोगों को निवेश की अच्छी आदत डालने में म्यूचुअल फंड्स ने बड़ा रोल निभाया है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए इसने आम लोगों को शेयर बाज़ार तक पहुंचाया। लेकिन जो लोग बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा कमाना चाहते हैं, उनके लिए म्यूचुअल फंड के कुछ नियम एक सीमा की तरह काम करते हैं।
सेबी के नियमों के मुताबिक, कोई भी म्यूचुअल फंड मैनेजर फंड का एक बड़ा हिस्सा (जैसे 20%) किसी एक कंपनी में नहीं लगा सकता। इसका मतलब है कि अगर कोई छोटी कंपनी है जिसका मार्केट कैप सिर्फ़ 200 करोड़ के आसपास है, लेकिन उसमें ग्रोथ की ज़बरदस्त संभावना है, तो भी म्यूचुअल फंड उसमें बड़ी रकम नहीं लगा सकते। ऐसा इसलिए है ताकि रिस्क कम करने के लिए निवेश को कई जगह बांटा जा सके। लेकिन बड़े निवेशकों के लिए यह नियम एक 'स्पीड-ब्रेकर' जैसा है, जो उन्हें भारतीय बाज़ार की पूरी रफ़्तार का फ़ायदा उठाने से रोकता है।
तो फिर ये AIF क्या चीज़ है?
अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) म्यूचुअल फंड से बिल्कुल अलग तरीके से काम करते हैं। ख़ासकर कैटेगरी I और कैटेगरी III AIF में, फंड मैनेजर्स को यह आज़ादी होती है कि वे कुछ गिनी-चुनी कंपनियों को चुनें, उन पर गहराई से रिसर्च करें और फिर उनमें बड़ी रकम लगा दें।
ऐसे फंड्स में निवेश करने के लिए कम से कम 1 करोड़ रुपये की ज़रूरत होती है। इसलिए आम लोग सीधे तौर पर इसमें निवेश नहीं कर सकते। ये फंड्स सिर्फ़ उन बड़े निवेशकों के लिए हैं जो ज़्यादा रिस्क लेने की क्षमता रखते हैं और लंबे समय तक पैसा लगाए रख सकते हैं।
SME: वो 'हीरे' जिन पर किसी की नज़र नहीं
भारत में BSE SME और NSE Emerge जैसे प्लेटफॉर्म्स पर 5000 से ज़्यादा छोटी कंपनियां लिस्टेड हैं। लेकिन बड़े इंस्टीट्यूशनल फंड्स या आम निवेशकों को इनके बारे में ज़्यादा पता नहीं होता। इनमें डिफेंस सेक्टर के लिए पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां, स्पेशियलिटी केमिकल्स, घरेलू लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की EPC कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कई कंपनियां हर साल 25% से 40% तक की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज कर रही हैं और उनकी आर्थिक हालत भी काफ़ी मज़बूत है। AIF फंड्स इन्हीं जगहों पर पैसा लगा रहे हैं, जहां बड़े फंड्स आसानी से नहीं पहुंच पाते।
अप्रैल 2024 का बाज़ार है सबूत
अप्रैल 2024 का महीना दुनिया भर के बाज़ारों के लिए काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा था। राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण बड़े-बड़े इंडेक्स हिल गए थे। लेकिन भारत की ये SME कंपनियां, जो घरेलू बाज़ार पर निर्भर हैं, उन पर वैश्विक संकट का ज़्यादा असर नहीं हुआ। इस मुश्किल दौर में भी, SME पर फोकस करने वाले फंड्स ने बड़े इंडेक्स से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। इससे बड़े निवेशकों का यह विश्वास और पक्का हो गया कि भारत का असली ग्रोथ इंजन सिर्फ़ निफ्टी 50 की कंपनियां नहीं, बल्कि 500 करोड़ से 2000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली ये उभरती हुई कंपनियां भी हैं।
आम निवेशक इससे क्या सीख सकते हैं?
असली ग्रोथ उन घरेलू कंपनियों में छिपी है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही हैं, लेकिन जिन पर ज़्यादा लोगों का ध्यान नहीं है। अगर आप अगले दशक में अच्छी दौलत बनाना चाहते हैं, तो खुद से पूछिए कि क्या आपने ऐसी जगहों पर निवेश किया है जहां असली ग्रोथ है? बड़े निवेशकों ने तो यह रास्ता सालों पहले खोज लिया था, लेकिन यह रास्ता आज भी आम निवेशकों के लिए खुला है।
ध्यान दें: इस लेख में दी गई जानकारी बाज़ार में निवेश के लिए कोई सीधी सलाह या सिफ़ारिश के लिए नहीं है। शेयर बाज़ार और AIF में निवेश बाज़ार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश योजना का पिछला प्रदर्शन भविष्य में भी वैसा ही रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। निवेश करने से पहले, सेबी-रजिस्टर्ड वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना और अपने स्तर पर रिसर्च करना ज़रूरी है। वित्तीय फ़ैसलों से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए यह लेख ज़िम्मेदार नहीं होगा।