ऐसे लोन लेने पर, समय पर किस्त चुकाना बहुत ज़रूरी है। अगर किस्त चूक गई, तो ब्याज सब्सिडी रद्द हो सकती है और जुर्माने के साथ लोन का बोझ बढ़ सकता है। बिना ब्याज वाली लोन योजनाएं सिर्फ़ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का एक ज़रिया भी हैं।

भारत में बिना ब्याज वाले लोन का मतलब दो तरह का होता है। एक, जिसमें पूरी तरह से कोई ब्याज नहीं लगता। दूसरा, जिसमें सरकार ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) के ज़रिए ब्याज का बोझ खुद उठाती है। यहां छात्रों, किसानों और छोटे व्यापारियों की मदद करने वाली सबसे अच्छी बिना ब्याज वाली लोन योजनाओं के बारे में बताया गया है। सरकार ने इन योजनाओं को कमजोर वर्गों को ऊपर उठाने के मकसद से शुरू किया है।

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पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) - स्ट्रीट वेंडर्स के लिए योजना

शहरी इलाकों के छोटे व्यापारियों के लिए केंद्र सरकार ने यह योजना शुरू की है। पहले ₹10,000 का लोन मिलता है। इसे सही समय पर चुकाने पर 7% की ब्याज सब्सिडी मिलती है। डिजिटल लेन-देन से मिलने वाले 'कैशबैक' और सब्सिडी को मिलाकर यह लोन लगभग बिना ब्याज का हो जाता है। पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma): बढ़ई, सुनार, कुम्हार जैसे पारंपरिक कारीगरों के लिए 2023 में यह योजना शुरू हुई है। इसमें सिर्फ 5% ब्याज है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में देती है। यह बिना किसी गारंटी (Collateral Free) वाला लोन है।

ध्यान रखने वाली शर्तें

ऐसे लोन लेने पर, समय पर किस्त चुकाना बहुत ज़रूरी है। अगर किस्त चूक गई, तो ब्याज सब्सिडी रद्द हो सकती है और जुर्माने के साथ लोन का बोझ बढ़ सकता है। आखिरी बात: भारत में बिना ब्याज वाली लोन योजनाएं सिर्फ़ आर्थिक मदद नहीं हैं, बल्कि ये लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और सामाजिक न्याय का एक ज़रिया हैं। योग्य लोग अपनी ज़रूरत के हिसाब से जनसमर्थ (JanSamarth) जैसे सरकारी पोर्टल्स के ज़रिए योजना ढूंढकर आवेदन कर सकते हैं।