टीचिंग की नौकरी के बोझ से परेशान होकर एक चीनी महिला ने जॉब छोड़ दी और ताबूत का बिजनेस शुरू कर दिया। लिसा लियू नाम की यह महिला ताबूत एक्सपोर्ट करके करोड़ों रुपये कमा रही है। 

सक्सेस स्टोरीः मौत के डर और अंधविश्वास को किनारे रखकर ताबूत बेचने निकली एक टीचर इन दिनों चीन में सुर्खियों में है। पूर्वी चीन के शेडोंग प्रांत के हेज़ शहर में 29 साल की पूर्व टीचर लिसा लियू ताबूत का बिजनेस करती हैं। लियू अपनी नौकरी छोड़कर इस ताबूत के बिजनेस में आई थीं। नौकरी के भारी बोझ से थककर लियू ने 2023 में ताबूत बेचने का काम शुरू किया। उनका बिजनेस यूरोपीय बाजार, खासकर इटली पर फोकस करता है। शुरू में उन्हें डर लगा, लेकिन जब उन्होंने देखा कि फैक्ट्री के मजदूर ताबूतों को सिर्फ लकड़ी का टुकड़ा मानते हैं और खाली कलशों का इस्तेमाल घर में सामान रखने के लिए करते हैं, तो लियू का डर खत्म हो गया।

यूरोपीय बाजार में हेज़ के ताबूतों की भारी मांग है। इसके मुख्य कारण ये हैं: इस इलाके में बहुतायत में उगने वाले 'पॉलोनिया' पेड़ों का इस्तेमाल इसके लिए किया जाता है। यह हल्की और आसानी से आग पकड़ने वाली लकड़ी इतालवी बाजार के लिए एकदम सही है। जहां यूरोप में एक ताबूत की कीमत 1,100 से 2,100 डॉलर तक होती है, वहीं चीन में बने ताबूतों की कीमत सिर्फ 90 से 150 डॉलर (लगभग 7,500 - 12,500 रुपये) है। चीन के भारी, गहरे रंग के ताबूतों के उलट, यहां इटली के लोगों के लिए हल्के और धार्मिक नक्काशी वाले ताबूत बनाए जाते हैं।

अकेले लियू की फैक्ट्री से हर साल 40,000 ताबूत यूरोप भेजे जाते हैं। इससे उन्हें लगभग 40 मिलियन युआन (करीब 53 करोड़ रुपये) की सालाना कमाई होती है। लियू का मानना है, 'चूंकि मौत निश्चित है, इसलिए इस बिजनेस में कभी मंदी नहीं आएगी।'

सिर्फ हेज़ ही नहीं, चीन का मिबाइशुआंग गांव भी इस क्षेत्र में मशहूर है। यहां अंतिम संस्कार के कपड़े, मालाएं और बॉडी बैग बनाकर दुनिया भर में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। अकेले 2020 में इस गांव का बिजनेस 100 करोड़ युआन से ज्यादा का था।