UPI Transaction Charges: UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा या नहीं? सरकार ने साफ किया कि आम यूजर्स से कोई फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, कुछ लोगों से MDR चार्ज ली जा सकती है।
UPI Payment Charges: क्या गूगल-पे, फोन-पे या पेटीएम से पैसे भेजने पर अब चार्ज देना पड़ेगा? यूपीआई को लेकर इन दिनों यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। अगर आप भी इस सवाल को लेकर परेशान हैं, तो अब राहत की सांस लीजिए, क्योंकि अब केंद्र सरकार ने एकदम साफ कर दिया है कि UPI से पेमेंट करने वाले आम यूजर्स पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि अगर आने वाले समय में MDR (Merchant Discount Rate) लगाया जाता है, तो यह हर दुकानदार या हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा। यह सिर्फ कुछ तरह के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन (Merchant Transactions) पर लगाया जा सकता है। तो आखिर MDR किसे देना पड़ सकता है, कितना देना होगा और आम UPI यूजर पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए पूरा मामला समझते हैं…
आम जनता के लिए पूरी तरह फ्री रहेगा UPI
PIB (Press Information Bureau) के अनुसार, सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में बिल्कुल साफ कर दिया है कि आम नागरिकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा। आप जब भी किसी दुकान पर सामान खरीदकर यूपीआई से पैसे चुकाएंगे, तो आपको एक भी रुपया एक्स्ट्रा नहीं देना होगा। आप अपने दोस्तों, परिवार या किसी भी परिचित को सीधे बैंक खाते में जो पैसे भेजते (P2P) हैं, वह सुविधा पहले की तरह एकदम फ्री रहेगी। यानी रोजमर्रा के लेन-देन के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वालों की जेब पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
तो फिर बदलाव क्यों हो रहा है?
सरकार का कहना है कि आज यूपीआई का इस्तेमाल इतना ज्यादा बढ़ गया है कि सिस्टम को सुपर-फास्ट, सुरक्षित और हैकर्स से बचाने के लिए लगातार बड़े अपग्रेड की जरूरत होती है। इसके अलावा देश के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों तक इस सुविधा को और फैलाने के लिए सिस्टम का आर्थिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। इसलिए कानून में बदलाव (Payment and Settlement Systems Act) की जरूरत है।
MDR किसे देना होगा?
सरकार का कहना है कि अगर भविष्य में कभी MDR चार्ज (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लाया भी जाता है, तो वह आम जनता या छोटे ग्राहकों पर बिल्कुल नहीं लगेगा। यह चार्ज सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारियों (Merchants) पर ही लागू होगा, वह भी तब जब उनका ट्रांजैक्शन एक निश्चित सीमा (Threshold Limit) से ज्यादा होगा। यह चार्ज भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले बेहद कम और नाममात्र का होगा।
अफवाहों से सावधान रहने की अपील
सरकार ने साफ किया है कि कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि किसी बाहरी दबाव में आकर यह बदलाव किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सरकार ने याद दिलाया कि अगर दबाव होता, तो साल 2016 में यूपीआई की शुरुआत ही क्यों की जाती और साल 2020 से इसे पूरी तरह फ्री क्यों रखा जाता? आज यूपीआई भारत की शान बन चुका है, जो दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। अकेले जुलाई 2026 में ही इस पर 2,366 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए हैं, और यह अब विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है। सरकार की तरफ से साफ संदेश है कि यूपीआई भारतीयों का अपना इनोवेशन है और यह नागरिकों के लिए हमेशा फ्री बना रहेगा। इसलिए किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।


