Nominee Dies Before Account Holder: अगर आपके बैंक खाते या निवेश में दर्ज नॉमिनी की आपसे पहले मौत हो जाती है, तो आपका नॉमिनेशन रद्द हो जाता है. भले ही पैसों पर आपका हक बना रहता है, लेकिन इसे अपडेट न करना आपके परिवार के लिए भविष्य में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है.

What Happens If Nominee Dies: बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस या डीमैट अकाउंट में नॉमिनी बनाना आज के समय में बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन अक्सर लोग नॉमिनी की जानकारी अपडेट करने के बाद उसे दोबारा चेक नहीं करते। ऐसे में अगर नॉमिनी की खाताधारक से पहले ही मृत्यु हो जाए और नया नॉमिनी दर्ज न कराया जाए, तो आगे चलकर परिवार के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।

नॉमिनी की मौत के बाद क्या होता है?

अगर आपके बैंक अकाउंट या किसी निवेश में दर्ज नॉमिनी की आपसे पहले मृत्यु हो जाती है, तो उस नॉमिनेशन को अपडेट कराना जरूरी हो जाता है। नॉमिनी के निधन के बाद पुराना नॉमिनेशन आपके लिए प्रभावी नहीं रहता। हालांकि, इससे आपके खाते में मौजूद रकम या निवेश पर आपका अधिकार खत्म नहीं होता।

असली समस्या उस समय सामने आती है जब खाताधारक की भी मृत्यु हो जाए और उससे पहले नॉमिनी का नाम बदला न गया हो। ऐसी स्थिति में पैसा पाने की प्रक्रिया सामान्य नॉमिनी क्लेम से अलग हो सकती है और कानूनी वारिसों को अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ सकते हैं।

नया नॉमिनी नहीं बनाया तो बढ़ सकती है मुश्किल

अगर खाताधारक की मृत्यु के समय कोई वैध नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो बैंक या वित्तीय संस्था कानूनी वारिसों से जरूरी दस्तावेज मांग सकती है। कुछ मामलों में परिवार को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या अन्य कानूनी दस्तावेज हासिल करने की जरूरत पड़ सकती है।

यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है। परिवार को दस्तावेज जुटाने, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित संस्थान में क्लेम दाखिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नॉमिनी की मृत्यु की जानकारी मिलते ही सभी जरूरी खातों और निवेशों में नाम अपडेट करना बेहतर है।

क्या नॉमिनी ही पैसे का असली मालिक होता है?

यह एक आम गलतफहमी है कि खाताधारक की मृत्यु के बाद नॉमिनी ही खाते या निवेश में मौजूद पूरी रकम का मालिक बन जाता है। वास्तव में नॉमिनी की भूमिका और कानूनी उत्तराधिकारी की भूमिका अलग-अलग होती है।

नॉमिनी आमतौर पर संबंधित वित्तीय संस्था से रकम प्राप्त करने की प्रक्रिया में मदद करता है। रकम पर अंतिम अधिकार वसीयत और लागू उत्तराधिकार कानूनों के आधार पर तय हो सकता है। इसलिए केवल नॉमिनी का नाम दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि वही व्यक्ति हर स्थिति में रकम का अंतिम मालिक होगा।

वसीयत होने पर क्या फर्क पड़ता है?

अगर खाताधारक ने वसीयत बनाई है, तो संपत्ति के बंटवारे में उसकी अहम भूमिका हो सकती है। वहीं, वसीयत नहीं होने की स्थिति में संबंधित उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार कानूनी वारिसों के अधिकार तय किए जाते हैं।

यही वजह है कि केवल नॉमिनी बनाना ही पर्याप्त नहीं है। समय-समय पर बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, डीमैट अकाउंट और अन्य वित्तीय निवेशों में दर्ज नॉमिनी की जानकारी की समीक्षा करनी चाहिए।

नॉमिनी की मौत की खबर मिलते ही करें ये काम

अगर आपके किसी खाते या निवेश में दर्ज नॉमिनी की मृत्यु हो गई है, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था से संपर्क करके नॉमिनी की जानकारी अपडेट कराएं। साथ ही अपने सभी वित्तीय खातों की सूची बनाकर यह जांच लें कि उनमें सही और मौजूदा नॉमिनी का नाम दर्ज है या नहीं।

ध्यान रखें: नॉमिनी से जुड़े नियम बैंक, निवेश उत्पाद और लागू कानून के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी विशेष मामले में संबंधित बैंक/वित्तीय संस्था या योग्य कानूनी सलाहकार से पुष्टि करना बेहतर है।