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भर्ती परीक्षा से चूकने वाले उम्मीदवारों को बंबई HC ने नहीं दी कोई राहत, ये है पूरा मामला

पीठ ने हालांकि, पाया कि चूंकि याचिकाकर्ता अर्हता (qualification) पूरी नहीं करते हैं इसलिए वह उनकी मदद नहीं कर सकती है। 

bombay high court declined relief to 10 persons who missed to appear in a recruitment exam kpt
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New Delhi, First Published Oct 5, 2020, 6:26 PM IST
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करियर डेस्क. बंबई उच्च न्यायालय ने रविवार को महाराष्ट्र के आयुध कारखाना में कार्यरत 10 व्यक्तियों को पांच अक्टूबर को होने वाली भर्ती परीक्षा की अर्हता पूरी नहीं कर पाने पर राहत देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी ने दुर्लभ घटना के तहत रविवार सुबह मामले की सुनवाई की क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने इसे अत्यावश्यक बताया था।

क्वालीफिकेशन पूरी नहीं करते इसलिए पीठ मदद नहीं कर सकती

पीठ ने हालांकि, पाया कि चूंकि याचिकाकर्ता अर्हता (qualification) पूरी नहीं करते हैं इसलिए वह उनकी मदद नहीं कर सकती है। महेश बाल्के और नौ अन्य याचिकाकर्ता महाराष्ट्र के एक आयुध काराखाना में कुशल कर्मी हैं और उन्होंने चार्जमैन (टेक्नीकल) पद के लिए आवेदन किया था जिसके लिए आयुध कारखाना बोर्ड ने इस साल मई में विज्ञापन दिया था।

आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 15 जून थी

भर्ती विज्ञापन के मुताबिक आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 15 जून थी और आवेदक को आवेदन करने की अंतिम तारीख तक मैकेनिकल या सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा उत्तीर्ण होना था।

महामारी की वजह से अंतिम परीक्षा में देरी हुई

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे सभी एआईसीटीई से सबद्ध विभिन्न महाविद्यालयों में इन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के छात्र हैं। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों की अंतिम परीक्षा अप्रैल/मई 2020 में होनी थी और जून में परिणाम आने थे, लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से अंतिम परीक्षा में देरी हुई और अबतक परीक्षा नहीं हो पाई है।

परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध

याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में भी अर्जी दी थी और परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, कैट ने पिछले महीने उनके अनुरोध को ठुकरा दिया। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का अनुरोध किया। उनका तर्क था कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम की अंतिम परीक्षा में हुई देरी में उनकी गलती नहीं है।

आवेदन करने की अनुमति नहीं दी गई 

उच्च न्यायालय ने हालांकि, रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं को भर्ती अधिसूचना और अर्हता को चुनौती देनी चाहिए। अदालत ने कहा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने इस बात को चुनौती दी कि अंतिम वर्ष के छात्रों, जिनके नतीजे लंबित हैं, को आवेदन करने की अनुमति नहीं दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें आपके मामले से पूरी सहानुभूति है

पीठ ने कहा, हालांकि, उच्चतम न्यायालय का फैसला है जिसके अनुसार अगर आवेदन की अंतिम तारीख तक उम्मीदवार अर्हता नहीं रखता है जो इस मामले में 15 जून है, तो नियोक्ता उनके आवेदन पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमें आपके मामले से पूरी सहानुभूति है, जैसा आपने अपनी याचिका में कहा कि चार साल में एक बार इस पद पर भर्ती का मौका मिलता है लेकिन उच्चतम न्यायालय का फैसला हमारे सामने है।’

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