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CBSE के परीक्षा पैटर्न में बदलाव, अब प्रैक्टिकल्स में जुड़ेंगे आंतरिक मूल्यांकन के अंक

बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 70 अंक वाले विषय में 23 अंक और 80 अंक वाले विषय में 26 अंक लाना अनिवार्य होगा। इतने अंक लाने के बाद ही परीक्षार्थी पास हो पाएंगे। वहीं प्रायोगिक परीक्षा में 20 अंक में छह अंक लाना जरूरी हैं। सीबीएसई ने 2020 सत्र से सभी विषयों की अंक व्यवस्था में बदलाव किया है।
 

change in marking schemes of subjects
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New Delhi, First Published Nov 17, 2019, 2:01 PM IST
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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं एवं 12वीं कक्षा के लिए सभी विषयों में उत्तीर्ण होने के लिए अंकों की व्यवस्था में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत जिन विषयों में प्रायोगिक परीक्षा नहीं होती है उनमें अब छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन के अंक भी जोड़े जाएंगे। बोर्ड ने तय किया है कि 10वीं कक्षा के छात्रों को उत्तीर्ण होने के लिए अब हर विषय में थियरी और प्रायोगिक परीक्षा को मिलाकर 33 प्रतिशत अंक लाने होंगे जबकि 12वीं के छात्रों के लिए प्रायोगिक, थियरी परीक्षा के साथ ही आंतरिक मूल्यांकन में भी अलग-अलग 33 फीसद अंक लाना जरूरी होगा। बोर्ड छात्रों पर बोझ कम करने के लिए 10वीं कक्षा में मार्च 2020 को समाप्त सत्र से गणित विषय में दो स्तरीय परीक्षा भी लेने जा रहा है।


सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘स्कूलों को पास अंक मानदंड की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है और इस बारे में एक पत्र भी जारी किया गया है जिसमें विषयवार अंक और उसके हिसाब से पास करने के अंक का ब्यौरा दिया गया है।’’ नए मानदंड के मुताबिक, 10वीं कक्षा में पास होने के लिए हर विषय में प्रायोगिक और सैद्धांतिक परीक्षा में मिलाकर 33 प्रतिशत अंक लाने होंगे, लेकिन 12वीं में ऐसा नहीं है। 12वीं कक्षा के छात्रों को पास होने के लिए प्रायोगिक, सैद्धांतिक पर्चे के साथ ही आंतरिक मूल्यांकन में अलग-अलग 33 फीसद अंक लाने होंगे ।

इसके तहत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 70 अंक वाले विषय में 23 अंक और 80 अंक वाले विषय में 26 अंक लाना अनिवार्य होगा। इतने अंक लाने के बाद ही परीक्षार्थी पास हो पाएंगे। वहीं प्रायोगिक परीक्षा में 20 अंक में छह अंक लाना जरूरी हैं। सीबीएसई ने 2020 सत्र से सभी विषयों की अंक व्यवस्था में बदलाव किया है।

मार्च 2020 से बदल जाएगा एग्जाम पैटर्न 
अधिकारियों ने बताया कि जिन विषयों में प्रायोगिक परीक्षा नहीं होती है, उन विषयों में इस बार से आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। अधिकतर विषयों में आंतरिक मूल्याकन के तहत 20 अंक रखे गए हैं। वहीं प्रायोगिक परीक्षा 30 अंकों की होगी। सीबीएसई इस बार से 10वीं कक्षा में मार्च 2020 को समाप्त हो रहे सत्र से गणित विषय में दो स्तरीय परीक्षा लेने जा रहा है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इसके तहत एक परीक्षा स्टैंडर्ड गणित और दूसरी बेसिक गणित की होगी । उन्होंने बताया, ‘‘ राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 के परीक्षा सुधार पर नेशनल फोकस ग्रुप के पत्र में कहा गया है कि छात्रों एवं स्कूलों को विषय चुनने संबंधी विकल्प की कुछ छूट होनी चाहिए जिसमें दो स्तरीय परीक्षा व्यवस्था हो। इससे छात्रों पर बोझ और तनाव कम होगा।’’ उन्होंने बताया कि इसी के अनुरूप मार्च 2020 को समाप्त सत्र से 10वीं कक्षा में गणित विषय में दो स्तरीय परीक्षा लेने की बात कही गई है । दोनों स्तर की परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम, कक्षा की पढ़ाई तथा आंतरिक मूल्यांकन समान रहेगा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्टैंडर्ड परीक्षा उन छात्रों के लिए होगा जो उच्च माध्यमिक स्तर पर गणित विषय लेंगे, जबकि बेसिक गणित परीक्षा उन छात्रों के लिए होगा लो उच्च स्तर पर गणित लेने के इच्छुक नहीं होंगे । बेसिक गणित के प्रश्न हल्के जबकि स्टैंडर्ड गणित के प्रश्न कठिन और कॉन्सेप्ट आधारित रहेंगे।

सीबीएसई ने जारी किया टाइम-टेबल 

सीबीएसई ने सभी विद्यालयों से 10वीं व 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षाएं 16 से 30 दिसंबर तक कराने का निर्देश दिया है। प्री-बोर्ड परीक्षा के लिए बोर्ड की समय-सारणी जारी कर दी गई है। बोर्ड ने प्री-बोर्ड की परीक्षाएं विद्यालयों को दो पालियों में से किसी एक पाली में अपनी सुविधानुसार कराने का निर्देश दिया है। सुबह की पाली में सुबह 9.30 से दोपहर 12.30 बजे एवं शाम की पाली में दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक प्री-बोर्ड परीक्षाएं कराई जा सकती हैं।

सभी विद्यालयों में अपलोड विषयवार सैंपल पेपर भी विद्यार्थियों से हल कराए जा रहे हैं, ताकि उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया जा सके।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

 

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