Job Market India: चेन्नई के एक बिजनेसमैन ने एक जॉब इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि वो 'आज की पीढ़ी से तालमेल नहीं बिठा पा रहे'। उम्मीदवार की मौजूदा CTC कितनी थी और उसने नई सैलरी के रूप में कितनी मांग की? उम्मीदवार की सैलरी अपेक्षा सुनकर सुमंत रमन ने क्या प्रतिक्रिया दी?
Recruitment Trends: चेन्नई के एक बिजनेसमैन ने एक जॉब इंटरव्यू के बाद कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वो 'आज की पीढ़ी से बिल्कुल कट गए हैं'। ये सब तब हुआ जब वो एक नौकरी के लिए आए उम्मीदवार से सैलरी पर बात कर रहे थे। Algorithm Health के फाउंडर सुमंत रमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक टेक रोल के लिए इंटरव्यू देने आए कैंडिडेट का चार साल का अनुभव था और उसकी मौजूदा सैलरी 7.2 लाख रुपये सालाना थी। जब उससे पूछा गया कि वो कितनी सैलरी की उम्मीद कर रहा है, तो उसने 16 लाख रुपये मांगे।

रमन ने लिखा, “कल एक टेक जॉब के लिए एक कैंडिडेट का इंटरव्यू लिया। 4 साल के अनुभव वाले इस कैंडिडेट की मौजूदा कंपनी में CTC 7.2 लाख रुपये है। जब उम्मीद पूछी, तो उसने 16 लाख रुपये मांगे। मैंने कहा कि यह तो मौजूदा CTC से दोगुने से भी ज़्यादा है। कैंडिडेट बोला, हां, मुझे इतना ही चाहिए। इसके तुरंत बाद बातचीत खत्म हो गई। मुझे तेजी से ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं आज की पीढ़ी से कट गया हूं।”
उनका ये पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद सैलरी नेगोशिएशन, मार्केट रेट और नौकरी से जुड़ी उम्मीदों पर एक बड़ी बहस छिड़ गई। लोग इस बात पर भी चर्चा करने लगे कि क्या किसी की नई सैलरी उसकी पुरानी सैलरी के आधार पर तय होनी चाहिए।
ज़्यादातर यूज़र्स ने कहा कि रमन की सोच नौकरी देने के पुराने तरीकों को दिखाती है। उनका कहना था कि सैलरी की उम्मीद कैंडिडेट के स्किल्स, अनुभव और मार्केट में चल रहे रेट के हिसाब से होनी चाहिए, न कि उसकी पिछली सैलरी के आधार पर।
एक यूज़र ने लिखा, “कैंडिडेट तो बाल-बाल बच गया। आप जैसे लोग इंसान की आत्मा निचोड़ लेंगे और उन्हें कम से कम पैसे देंगे। और आप इसलिए आउट ऑफ टच हैं क्योंकि आपने इस स्थिति में एक युवा की ज़िंदगी नहीं जी है। बड़ी MNCs में आज 4 साल के अनुभव पर 16 लाख रुपये का पैकेज बेसलाइन से भी कम है। मुझे लगता है कि आपको अपने आंकड़े अपडेट करने की ज़रूरत है।”
एक और यूज़र ने कमेंट किया, “आप सही कह रहे हैं कि आप उस पीढ़ी से कट गए हैं जो अपनी कीमत और मार्केट प्राइस जानती है। आपकी पीढ़ी में लोगों के पास ये जानने के लिए वैसे टूल्स नहीं थे जो आज हैं, कि उन्हें कम आंका जा रहा है। ज़ाहिर है, आप आउट ऑफ टच महसूस करेंगे। आज की पीढ़ी में प्रति व्यक्ति आत्म-सम्मान ज़्यादा है।”
कई यूज़र्स ने तो यहां तक कहा कि कैंडिडेट की मांग न तो ज़्यादा थी और न ही गलत। एक यूज़र ने लिखा, “यह कोई बड़ी मांग नहीं है। उसे कम पैसे मिल रहे हैं।” वहीं एक और ने कमेंट किया, “कैंडिडेट के लिए अच्छा हुआ! अगर पिछली CTC ही पैमाना है, स्किल नहीं, तो उन्हें अपनी मौजूदा कंपनी में ही रहना चाहिए। ये कितनी पुरानी और दखल देने वाली प्रथा है!”
