नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले टेकी को दो साल में सैलरी हाइक के नाम पर सिर्फ 9 रुपये मिले। उसने सोशल मीडिया पर लिखा कि उसे वीकेंड पर भी गुलाम की तरह काम करना पड़ता है और सर्विस बॉन्ड की वजह से नौकरी भी नहीं छोड़ सकता।

एक तरफ छोटी कंपनियां खुद को बचाने के लिए जूझ रही हैं, वहीं मल्टीनेशनल कंपनियां (MNCs) दिन-ब-दिन बड़ी होती जा रही हैं। लेकिन इन बड़ी कंपनियों में कर्मचारियों के साथ जो हो रहा है, वो हैरान करने वाला है। नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हुए हालिया प्रदर्शन भी इसी ओर इशारा करते हैं। ऐसा ही एक मामला तब सामने आया जब एक MNC में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि दो साल में उसकी सैलरी सिर्फ 9 रुपये बढ़ी है। इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने भी माना कि उनके साथ भी 'धोखा' हुआ है।

दो साल में सैलरी बढ़ी सिर्फ '9 रुपये'

दिल्ली-NCR में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया। उसने लिखा कि उसे पिछले साल सिर्फ 9 रुपये का हाइक मिला था, और इस साल तो वो भी नहीं मिला। वह अब कंपनी छोड़ना चाहता है। उसने 'इस कंपनी और सहकर्मियों से तंग आ चुका हूं' (I so done with this company and colleagues) टाइटल के साथ रेडिट पर एक पोस्ट लिखी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। उसने लिखा कि वीकेंड पर भी उससे 'गुलाम की तरह' काम लिया जाता है, लेकिन वो नौकरी में 'फंसा हुआ' महसूस कर रहा है।

उसने मई 2024 में एक मशहूर MNC में इंटर्न के तौर पर जॉइन किया था, जिसके बाद उसे फुल-टाइम नौकरी मिल गई। उसे उम्मीद थी कि शुरुआती पैकेज 4.25 लाख रुपये सालाना होगा, लेकिन उसे इससे काफी कम सैलरी मिली। उसने बताया कि ग्रेजुएशन के बाद जॉब मार्केट बहुत खराब था, इसलिए उसे यह ऑफर लेना पड़ा। उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। यह नौकरी उसे दो साल के सर्विस बॉन्ड के साथ मिली थी।

अगर उसे दो साल से पहले नौकरी छोड़नी है, तो उसे कंपनी को 1.5 लाख रुपये देने होंगे। साथ ही, कर्मचारियों को 6 महीने का नोटिस पीरियड भी देना पड़ता है, जिससे नौकरी बदलना और भी मुश्किल हो जाता है। उसे पहले साल सिर्फ 9 रुपये की सैलरी बढ़ोतरी मिली। उसने निराशा जताते हुए लिखा, “और इस साल, उन्होंने मुझे वो भी देने की जहमत नहीं उठाई।” दो साल तक कंपनी के लिए मेहनत करने के बावजूद सैलरी न बढ़ने से वह काफी निराश है।

गुलाम की तरह करवाते हैं काम

ऑफिस के काम के साथ-साथ उसे क्लाइंट साइट्स पर भी जाना पड़ता है, जिससे उसका काम का बोझ और बढ़ गया है। उसने लिखा, 'मुझसे अक्सर एक गुलाम की तरह काम लिया जाता है।' हर ट्रिप पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन कंपनी ट्रैवल का कोई खर्चा नहीं देती। उसे अक्सर वीकेंड पर भी काम करना पड़ता है। राहत की बात बस इतनी है कि इसके बदले उसे बाद में छुट्टी (compensatory off) मिल जाती है। लेकिन, जो काम वो करता है, उसकी सैलरी नहीं मिलती। दो साल में खर्चे तो बढ़ गए, लेकिन सैलरी वहीं की वहीं है। उसने लिखा, 'मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ऐसे गड्ढे में फंस गया हूं, जहां हर कोई मेरा फायदा उठा रहा है। मैं थोड़े पैसे भी नहीं बचा पा रहा हूं और इस मुसीबत से बाहर निकलना चाहता हूं।' सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने कमेंट किया कि भारत में लगभग हर सेक्टर में यही हाल है।