नोएडा के एक डॉक्टर ने बढ़ती स्कूल फीस को माता-पिता पर एक बड़ा आर्थिक और भावनात्मक बोझ बताया है। उन्होंने इसे एक 'खामोश बलिदान' कहा है, जिसके लिए अभिभावक अपने सपने और छुट्टियां कुर्बान करते हैं। इस पोस्ट को कई लोगों का समर्थन मिला है।

भारत के कई शहरों में माता-पिता के लिए बच्चों की पढ़ाई का बढ़ता खर्च एक बड़ी समस्या है। हाल ही में, नोएडा के एक डॉक्टर ने इस बढ़ते संकट के बारे में एक पोस्ट शेयर किया है, जो काफी ध्यान खींच रहा है। पोस्ट में कहा गया है कि स्कूल की फीस अब सिर्फ एक आर्थिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर महीने एक दबाव बन गई है। नोएडा के डॉक्टर, डॉ. श्रद्धेय कटियार ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें स्कूल की फीस बढ़ने से होने वाली इमोशनल और आर्थिक मुश्किलों पर जोर दिया गया है।

कटियार ने अपने पोस्ट में लिखा है कि स्कूल की फीस सिर्फ माता-पिता की कमाई का ही नहीं, बल्कि उनके सब्र का भी इम्तिहान लेती है। 'हर साल फीस का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। माता-पिता चुपचाप इसके हिसाब से अपनी जिंदगी को ढाल लेते हैं। छुट्टियां कम हो जाती हैं। सपने अधूरे रह जाते हैं। एक्स्ट्रा शिफ्ट करनी पड़ती है। कोई शिकायत नहीं। यह एक खामोश बलिदान है,' कटियार ने पोस्ट में लिखा।

'अच्छी क्वालिटी की शिक्षा' के नाम पर कई लोग स्कूल फीस में बढ़ोतरी को सही ठहराते हैं। लेकिन, क्लास बच्चों से खचाखच भरी होती हैं, टीचरों को अच्छी सैलरी नहीं मिलती। माता-पिता के लिए यह हर महीने एक धमकी जैसा बनता जा रहा है। यह कैसे हो रहा है?' कटियार ने सवाल उठाया।

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कई माता-पिता ने इस पोस्ट का समर्थन करते हुए कमेंट्स किए हैं। बहुत से लोगों ने अपने ऐसे ही अनुभव शेयर किए। कई लोगों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के खर्च के कारण वे अपनी जिंदगी की कई जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, और यह फीस लगभग हर महीने बढ़ती जा रही है, इस पर कोई कंट्रोल होना चाहिए।